Showing posts with label Mata MahaGauri. Show all posts
Showing posts with label Mata MahaGauri. Show all posts

Thursday, 14 April 2016

Chaitra Navratri 2016 - मां का आठवां स्वरूप महागौरी

दुर्गा जी महागौरी अवतार

 
 
 
शंख और चन्द्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी "माँ महागौरी" माँ दुर्गा का आठवां स्वरुप हैं। नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरा की पूजा की जाती है। यह शिव जी की अर्धांगिनी है। कठोर तपस्या के बाद देवी ने शिव जी को अपने पति के रुप में प्राप्त किया था।
 
मां दुर्गा का आठवां रूप महागौरी व्यक्ति के भीतर पल रहे कुत्सित व मलिन विचारों को समाप्त कर प्रज्ञा व ज्ञान की ज्योति जलाता है। मां का ध्यान करने से व्यक्ति को आत्मिक ज्ञान की अनुभूति होती है उसके भीतर श्रद्धा विश्वास व निष्ठ की भावना बढ़ाता है। मां दुर्गा की अष्टम शक्ति है महागौरी जिसकी आराधना से उसके पुत्रों (भक्तों) को जीवन की सही राह का ज्ञान होता है जिस पर चलकर वह अपने जीवन का सार्थक बना सकता है। नवरात्र में मां के इस रूप की आराधना व्यक्ति के समस्त पापों का नाश करती है। व्रत रहकर मां का पूजन कर उसे भोग लगाएं तथा उसके बाद मां का प्रसाद ग्रहण करे जिससे व्यक्ति के भीतर के दुराभाव दूर होते हैं।नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की आराधना की जाती है। आज के दिन मां की स्तुति से समस्त पापों का नाश होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां ने कठिन तप कर गौरवर्ण प्राप्त किया था। मां की उत्पत्ति के समय इनकी आयु आठ वर्ष की थी जिस कारण इनका पूजन अष्टमी को किया जाता है। मां अपने भक्तों के लिए अन्नपूर्णा स्वरूप है। आज ही के दिन कन्याओं के पूजन का विधान है। मां धन वैभव, सुख शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। मां का स्वरूप ब्राह्मण को उज्जवल करने वाला तथा शंख, चन्द्र व कुंद के फूल के समान उज्जवल है। मां वृषभवाहिनी (बैल) शांति स्वरूपा है। कहा जाता है कि मां ने शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया जिसके बाद उनका शरीर मिटटी ढक गया। आखिरकार भगवान महादेव उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी होने का आर्शीवाद प्रदान किया। भगवान शंकर ने इनके शरीर को गंगाजल से धोया जिसके बाद मां गौरी का शरीर विद्युत के समान गौर व दैदीप्यमान हो गया। इसी कारण इनका नाम महागौरी पड़ा। मां संगीत व गायन से प्रसन्न होती है तथा इनके पूजन में संगीत अवश्य होता है। कहा जाता है कि आज के दिन मां की आराधना सच्चे मन से होता तथा मां के स्वरूप में ही पृथ्वी पर आयी कन्याओं को भोजन करा उनका आर्शीवाद लेने से मां अपने भक्तों को आर्शीवाद अवश्य देती है। हिन्दू धर्म में अष्टiमी के दिन कन्याओं को भोजन कराए जाने की परम्परा है।
 
महागौरा के रुप में दुर्गा जी का स्वरुप
देवी महागौरा के शरीर बहुत गोरा है। महागौरा के वस्त्र और अभुषण श्वेत होने के कारण उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है। महागौरा की चार भुजाएं है जिनमें से उनके दो हाथों में डमरु और त्रिशुल है तथा अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में है। इनका वाहन गाय है। इनके महागौरा नाम पड़ने की कथा कुछ इस प्रकार है।
 
महागौरा नाम कैसे पड़ा
मान्यतानुसार भगवान शिव को पाने के लिए किये गए अपने कठोर तप के कारण माँ पार्वती का रंग काला और शरीर क्षीण हो गया था, तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने माँ पार्वती का शरीर गंगाजल से धोया तो वह विद्युत प्रभा के समान गौर हो गया। इसी कारण माँ को "महागौरी" के नाम से पूजते हैं।
 
माँ महागौरी का मंत्र
महागौरी की उपासना का मंत्र है-
 
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा॥
 
नवरात्र का आठवां दिन
नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं। मां महागौरी की पूजा चैत्र नवरात्र में 14 अप्रैल, 2016 और शारदीय नवरात्र में 09 अक्टूबर, 2016 को होगी।
 
पूजा में उपयोगी खाद्य साम्रगी
अष्टमी तिथि के दिन भगवती को नारियल का भोग लगाना चाहिए। फिर नैवेद्य रूप वह नारियल ब्राह्मण को दे देना चाहिए। इसके फलस्वरूप उस पुरुष के पास किसी प्रकार का संताप नहीं आ सकता। श्री दुर्गा जी के आठवें स्वरूप महागौरी मां का प्रसिद्ध पीठ हरिद्वार के समीप कनखल नामक स्थान पर है।