Wednesday, 27 December 2017

Tulsi Pujan Divas Celebrations at AshramHaridwar

संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में 25th दिसम्बर तुलसी पूजन दिवस के रूप में मनाया गया। भक्तों ने पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ तुलसीजी का पूजन, अर्चन तथा परिक्रमा की।

We are very grateful to Sant Shri Asharam Bapuji for initialising this day as #तुलसी_पूजन_दिवस  (BasilWorshipDay) & giving the mankind a useful and precious gift no Merry Christmas.





Tuesday, 19 December 2017

The Melodious Song of Gangaji

काशी हो या कलकत्ता, ऋषिकेश हो या बनारस माँ गंगा का मधुर गान ऐसी आत्मिक शांति देता है कि लगता है यह गान बस सुनते ही जायें।

तो आईये सुनते हैं माँ गंगा का मधुर गान...

The Gangaji is worshiped by HINDUS who believe that bathing in this holy river causes the remission of sins and facilitates Moksha (liberation from the cycle of life & death). The water of the Ganges is very pure.

Come, sit and listen to the melodious song of Gangaji...

Tuesday, 12 December 2017

सफला एकादशी - 13 दिसम्बर 2017

युधिष्ठिर ने पूछा : स्वामिन् ! पौष मास के कृष्णपक्ष (गुज., महा. के लिए मार्गशीर्ष) में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है? उसकी क्या विधि है तथा उसमें किस देवता की पूजा की जाती है ? यह बताइये ।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजेन्द्र ! बड़ी बड़ी दक्षिणावाले यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है । पौष मास के कृष्णपक्ष में ‘सफला’ नाम की एकादशी होती है । उस दिन विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए । जैसे नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़ तथा देवताओं में श्रीविष्णु श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण व्रतों में एकादशी तिथि श्रेष्ठ है ।

राजन् ! ‘सफला एकादशी’ को नाम मंत्रों का उच्चारण करके नारियल के फल, सुपारी, बिजौरा तथा जमीरा नींबू, अनार, सुन्दर आँवला, लौंग, बेर तथा विशेषत: आम के फलों और धूप दीप से श्रीहरि का पूजन करे । ‘सफला एकादशी’ को विशेष रुप से दीप दान करने का विधान है । रात को वैष्णव पुरुषों के साथ जागरण करना चाहिए । जागरण करनेवाले को जिस फल की प्राप्ति होती है, वह हजारों वर्ष तपस्या करने से भी नहीं मिलता ।

नृपश्रेष्ठ ! अब ‘सफला एकादशी’ की शुभकारिणी कथा सुनो । चम्पावती नाम से विख्यात एक पुरी है, जो कभी राजा माहिष्मत की राजधानी थी । राजर्षि माहिष्मत के पाँच पुत्र थे । उनमें जो ज्येष्ठ था, वह सदा पापकर्म में ही लगा रहता था । परस्त्रीगामी और वेश्यासक्त था । उसने पिता के धन को पापकर्म में ही खर्च किया । वह सदा दुराचारपरायण तथा वैष्णवों और देवताओं की निन्दा किया करता था । अपने पुत्र को ऐसा पापाचारी देखकर राजा माहिष्मत ने राजकुमारों में उसका नाम लुम्भक रख दिया। फिर पिता और भाईयों ने मिलकर उसे राज्य से बाहर निकाल दिया । लुम्भक गहन वन में चला गया । वहीं रहकर उसने प्राय: समूचे नगर का धन लूट लिया । एक दिन जब वह रात में चोरी करने के लिए नगर में आया तो सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया । किन्तु जब उसने अपने को राजा माहिष्मत का पुत्र बतलाया तो सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया । फिर वह वन में लौट आया और मांस तथा वृक्षों के फल खाकर जीवन निर्वाह करने लगा । उस दुष्ट का विश्राम स्थान पीपल वृक्ष बहुत वर्षों पुराना था । उस वन में वह वृक्ष एक महान देवता माना जाता था । पापबुद्धि लुम्भक वहीं निवास करता था ।

एक दिन किसी संचित पुण्य के प्रभाव से उसके द्वारा एकादशी के व्रत का पालन हो गया । पौष मास में कृष्णपक्ष की दशमी के दिन पापिष्ठ लुम्भक ने वृक्षों के फल खाये और वस्त्रहीन होने के कारण रातभर जाड़े का कष्ट भोगा । उस समय न तो उसे नींद आयी और न आराम ही मिला । वह निष्प्राण सा हो रहा था । सूर्योदय होने पर भी उसको होश नहीं आया । ‘सफला एकादशी’ के दिन भी लुम्भक बेहोश पड़ा रहा । दोपहर होने पर उसे चेतना प्राप्त हुई । फिर इधर उधर दृष्टि डालकर वह आसन से उठा और लँगड़े की भाँति लड़खड़ाता हुआ वन के भीतर गया । वह भूख से दुर्बल और पीड़ित हो रहा था । राजन् ! लुम्भक बहुत से फल लेकर जब तक विश्राम स्थल पर लौटा, तब तक सूर्यदेव अस्त हो गये । तब उसने उस पीपल वृक्ष की जड़ में बहुत से फल निवेदन करते हुए कहा: ‘इन फलों से लक्ष्मीपति भगवान विष्णु संतुष्ट हों ।’ यों कहकर लुम्भक ने रातभर नींद नहीं ली । इस प्रकार अनायास ही उसने इस व्रत का पालन कर लिया । उस समय सहसा आकाशवाणी हुई: ‘राजकुमार ! तुम ‘सफला एकादशी’ के प्रसाद से राज्य और पुत्र प्राप्त करोगे ।’ ‘बहुत अच्छा’ कहकर उसने वह वरदान स्वीकार किया । इसके बाद उसका रुप दिव्य हो गया । तबसे उसकी उत्तम बुद्धि भगवान विष्णु के भजन में लग गयी । दिव्य आभूषणों से सुशोभित होकर उसने निष्कण्टक राज्य प्राप्त किया और पंद्रह वर्षों तक वह उसका संचालन करता रहा । उसको मनोज्ञ नामक पुत्र उत्पन्न हुआ । जब वह बड़ा हुआ, तब लुम्भक ने तुरंत ही राज्य की ममता छोड़कर उसे पुत्र को सौंप दिया और वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के समीप चला गया, जहाँ जाकर मनुष्य कभी शोक में नहीं पड़ता ।

राजन् ! इस प्रकार जो ‘सफला एकादशी’ का उत्तम व्रत करता है, वह इस लोक में सुख भोगकर मरने के पश्चात् मोक्ष को प्राप्त होता है । संसार में वे मनुष्य धन्य हैं, जो ‘सफला एकादशी’ के व्रत में लगे रहते हैं, उन्हीं का जन्म सफल है । महाराज! इसकी महिमा को पढ़ने, सुनने तथा उसके अनुसार आचरण करने से मनुष्य राजसूय यज्ञ का फल पाता है ।


संतश्री आशारामजी बापू अमृतवाणी - सफला एकादशी व्रत कथा:

Monday, 11 December 2017

तीन दिवसीय राष्ट्रीय तेजस्वी युवा शिविर का समापन

"समाज को संतों का योगदान महाकल्याणकारी है व सदैव अनुकरणीय है।"


Bogus Cases On Rise against Innocent Saints but their contribution to the society is enormous and all are taking advantage of their grace.


Wednesday, 6 December 2017

Press Release: Sadhvi Puja Bahen Satsang at AshramHaridwar

"The land where the Saints are not respected is a cremation ground."

चारों ओर से संकट में घिरे होने के बाद भी भारत देश यदि सुरक्षित है तो अपने संत-महात्माओं व उनकी आध्यात्मिकता के कारण।

"आओ संतों की गरिमा और बढायें 
राष्ट्र को आध्यात्मिक बनायें।"




Monday, 4 December 2017

Sadhvi Puja Bahen Satsang @ AshramHaridwar

"सच्चे संत चाहे जहाँ भी रहें सदैव समता के साम्राज्य में रमण करते हुए समाज कल्याण में रत रहते हैं।"

ऐसे ही, परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों पूज्य गुरुदेव के सतत मार्गदर्शन द्वारा सत्संग तथा सेवा का कोई भी अवसर ना चूकने वाले व सदैव आत्मकल्याण में रत संतश्री आशारामजी बापू के साधक, आश्रम हरिद्वार में मार्गशीर्ष पूर्णिमा की कड़ाके की ठंड में साध्वी पूजा बहन के सत्संग में डूबे हुए।






Friday, 1 December 2017

Sadhvi Puja Bahen Satsang at AshramHaridwar

"सूर्य तो बाहर का अंधकार मिटाता है किन्तु अन्दर का अंधकार तो सद्गुरू के सत्संग और ज्ञान से ही मिटता है।" Pujya Asharam BapuJi

धर्मनगरी हरिद्वार में मार्गशीर्ष पूर्णिमा निमित्त पूज्य संतश्री आशारामजी बापू की शिष्या साध्वी पूजा बहन का सत्संग

दिनाँक - 3 दिसम्बर 2017


समय - शाम 5 बजे से

स्थान - संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिपुरकलां, हरिद्वार

सम्पर्क - 09997008832, 08755531150