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Monday, 10 August 2020

Raksha Bandhan News Coverage - Haridwar

 हरिद्वार में कोरोना योद्धाओं (पुलिस) को किया गया सम्मानित। उत्तराखंड पुलिस को भेंट की आयुष किट, तुलसी टॉफी, गौचन्द धूप, मास्क, दस्ताने और कॉफी मग। महिला उत्थान मंडल व सार्थक एनजीओ द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित कार्यक्रम की प्रैस रिलीज:

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Raksha Bandhan Celebrations @ AshramHaridwar

कल संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में श्रावणी पूर्णिमा व रक्षाबंधन पर्व मनाया गया।

पहले पूज्य गुरुदेव की पादुका के साथ आश्रम की परिक्रमा की गई, इसके पश्चात पादुका पूजन हुआ। वीडियो सत्संग,भजन-कीर्तन व भण्डारे का आनन्द लेकर सभी ने रक्षाबंधन पर्व मनाया।

रक्षाबंधन के एक दिन पूर्व साधिका बहनों द्वारा गीता कुटीर पुलिस चौकी व थाना रायवाला में कोरोना योद्धाओं के रूप में, सब-इंस्पेक्टर श्रीप्रेम सिंह नेगी व अन्य पुलिसकर्मियों को सम्मानित कर वैदिक रक्षासूत्र बांधे गये। इस अवसर पर उन्हें आश्रम की पुस्तिका 'ऋषि प्रसाद' भी भेंट की गई।

Saturday, 1 August 2020

3 अगस्त - रक्षाबंधन

कोरोना से बचें व अपनों को भी बचायें,

आओ मिलकर सुरक्षित रक्षाबंधन मनायें।


भाई-बहन के पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन की आप सभी को बधाई। प्राचीन काल से ही भारत में इस दिन रक्षासूत्र बांधने का अत्यंत महत्त्व है और यह बड़ी ही आसानी से बनाया जा सकता है। इस कोरोना संक्रमण के समय में तो यह सूत्र हमें स्वयं ही बनाना चाहिये। कैसे बनाया जाता है वैदिक रक्षा सूत्र? क्या है इसका महत्व और क्यों है यह पवित्र व शक्तिशाली? जानने के लिये ऊपर दिये गये वीडियो लिंक को क्लिक करें☝️


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Monday, 12 August 2019

15 August - Independence Day and RakshaBandhan

स्वतंत्रता दिवस रक्षाबंधन -15 अगस्त

"Feel the pride of being an integral part of glorious INDIA."

संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार की ओर से आप सभी को "भारतीय स्वतंत्रता दिवस" तथा "रक्षाबंधन" की हार्दिक बधाई।

पूज्य बापूजी हमें बता रहे हैं "वैदिक रक्षाबंधन" के बारे में। क्या है वैदिक रक्षाबंधन हमें यह क्यों मनाना चाहिये? वैदिक रक्षासूत्र बनाने की सरल विधि किस तरह भाईयों के जीवन को उन्नत और सुखमय बनाता है - "वैदिक रक्षाबंधन", जानने के लिये नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें पायें पूरी जानकारी 👇



Sunday, 20 August 2017

Rakshabandhan with Fremont Police, California

#WakeUpHindus "The whole world is waiting for the "Love & Amity" that only "YOU" can give because your Saints taught you to give it."

Sant Shri Asharamji Bapu Ashram, California (America) celebrates Rakshabandhan with Fremont Police, California. 

Must read:-

Monday, 7 August 2017

Let us celebrate Vedic RakshaBandhan

शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का प्रतीक भारतीय संस्कृति के पर्व #RakshaBandhan की सभी को शुभकामनायें। 

जानिये कैसे मनायें वैदिक रीति से रक्षाबन्धन:


Vedic RakshaBandhan

रक्षाबंधन - 7th अगस्त 2017

कैसे मनायें "वैदिक रक्षाबंधन" :-
पूज्य संतश्री आशाराम बापूजी अपने सत्संगों में वैदिक रक्षा बन्धन का महत्व बताते हुए कहते हैं कि “रक्षासूत्र” मात्र एक धागा नहीं बल्कि शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पुलिंदा है। यह सूत्र जब वैदिक रीति से बनाया जाता है और भगवन्नाम जप व भगवद्भाव सहित शुभ संकल्प करके बाँधा जाता है तो इसका सामर्थ्य असीम हो जाता है।“ वैदिक राखी बनाने के लिए एक छोटा-सा ऊनी, सूती या रेशमी पीले कपड़े का टुकड़ा लें, उसमें - १) दूर्वा २) अक्षत (साबूत चावल) ३) केसर या हल्दी ४) शुद्ध चंदन ५) सरसों के साबूत दाने इन पाँच चीजों को मिलाकर कपड़े में बाँधकर सिलाई कर दें । फिर कलावे से जोड़कर राखी का आकार दें। सामर्थ्य हो तो इन पाँच वस्तुओं के साथ स्वर्ण भी डाल सकते हैं। वैदिक राखी में डाली जाने वाली वस्तुएँ हमारे जीवन को उन्नति की ओर ले जाने वाले संकल्पों को पोषित करती हैं, जैसे :-

(१) दूर्वा:- दूर्वा का एक अंकुर जमीन में लगाने पर वह हजारों की संख्या में फैल जाती है, वैसे ही “हमारे भाई या हितैषी के जीवन में भी सद्गुण फैलते जायें, बढ़ते जायें...” इस भावना का द्योतक है दूर्वा । दूर्वा गणेशजी की प्रिय है अर्थात् हम जिनको राखी बाँध रहे हैं उनके जीवन में आनेवाले विघ्नों का नाश हो जाये।

(२) अक्षत (साबूत चावल):- भाई-बहन का प्रेम व विश्वास अटूट हो। हमारी भक्ति और श्रद्धा भगवान के, गुरु के चरणों में अक्षत हो, अखंड हो, कभी क्षत-विक्षत न हो - यह अक्षत का संकेत है। अक्षत पूर्णता की भावना के प्रतीक हैं । जो कुछ अर्पित किया जाय, पूरी भावना के साथ किया जाये।

(३) केसर या हल्दी:- केसर की प्रकृति तेज होती है अर्थात् हम जिनको यह रक्षासूत्र बाँध रहे हैं उनका जीवन तेजस्वी हो । उनका आध्यात्मिक तेज, भक्ति और ज्ञान का तेज बढ़ता जाये । केसर की जगह पिसी हल्दी का भी प्रयोग कर सकते हैं । हल्दी पवित्रता व शुभ का प्रतीक है । यह नजरदोष व नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है तथा उत्तम स्वास्थ्य व सम्पन्नता लाती है।

(४) चंदन:- चंदन दूसरों को शीतलता और सुगंध देता है । यह इस भावना का द्योतक है कि जिनको हम राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में सदैव शीतलता बनी रहे, कभी तनाव न हो । उनके द्वारा दूसरों को पवित्रता, सज्जनता व संयम आदि की सुगंध मिलती रहे । उनकी सेवा-सुवास दूर तक फैले।

(५) सरसों:- सरसों तीक्ष्ण होती है। इसी प्रकार हम अपने दुर्गुणों का विनाश करने में, समाज-द्रोहियों को सबक सिखाने में तीक्ष्ण बनें।

अतः यह वैदिक रक्षासूत्र शुभ संकल्पों से परिपूर्ण होने के कारण सर्व-मंगलकारी है। रक्षासूत्र बाँधते समय यह श्लोक बोला जाता है:-
“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।“

इस मंत्रोच्चारण व शुभ संकल्प सहित वैदिक राखी बहन अपने भाई को, माँ अपने बेटे को, दादी अपने पोते को बाँध सकती है । यही नहीं, शिष्य भी यदि इस वैदिक राखी को अपने सद्गुरु को प्रेम सहित अर्पण करता है तो उसकी सब अमंगलों से रक्षा होती है तथा गुरुभक्ति बढ़ती है। शिष्य सद्गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय ‘अभिबध्नामि’ के स्थान पर ‘रक्षबध्नामि’ कहे।

Thursday, 18 August 2016

Raksha Bandhan - ‪#‎वैदिक_रक्षा_बंधन

रक्षा बंधन - 18 अगस्त 2016

 

जानिए कैसे मनाएँ ‪#‎वैदिक_रक्षा_बंधन‬ :-

वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :

इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है - (१) दूर्वा (घास) (२) अक्षत (चावल) (३) केसर (४) चन्दन (५) सरसों के दाने। इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।

इन पांच वस्तुओं का महत्त्व - (१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमें सदगुणों का विकास तेज़ी से हो। सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ती जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन से विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षत - हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे।

(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो। उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो।

(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे।

(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम भगवान अथवा गुरुदेव के श्रीचित्र पर अर्पित करें। फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे। इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं व पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सुखी रहते हैं ।

राखी बाँधते समय बहन यह मंत्र बोले– " येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: |तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल ||"

शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय ‘अभिबन्धामि ‘ के स्थान पर ‘रक्षबन्धामि’ कहे |

चाकलेट ना खिलाकर भारतीय मिठाई या गुड से मुहं मीठा कराएँ। अपना देश, अपनी सभ्यता, अपनी संस्कृति, अपनी भाषा, अपना गौरव !!!