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Tuesday, 31 August 2021

Happy Guru Purnima - 23rd July 2021

"When you choose a Guru,

You become a follower,

When your Guru chooses you,

You become a disciple."


The word "GURU" is derived from 2 words- "GU" and "RU." The Sanskrit root "GU" means darkness or ignorance and "RU" denotes the remover of darkness. Therefore, a Guru is one who removes the darkness of our ignorance. But how to remove or dispel darkness?


You cannot kick the darkness out of a place because darkness is not an existence by itself. Darkness is just absence of light. A true Guru, who has realised his identity with the Omnipresent Spirit, can lead the seeker on his inward journey towards perfection. According to Yoganand Paramhansji- "Only a master, one who knows GOD may rightly teach others about HIM." He, who faithfully follows a true Guru becomes like him.


Let's celebrate Guru Purnima wholeheartedly.


Friday, 18 June 2021

गंगा दशहरा - 20 जून

गंगा पापं शशि तापं दैन्यम् कल्पतरुस्तथा ।

पापं तापं च दैन्यम् च हन्ति साधु समागमः ।।

शास्त्रों में संगति की महिमा बताते हुए कहा गया है कि गंगा स्नान से पाप, चन्द्रमा के दर्शन से ताप (गर्मी) एवं कल्पवृक्ष का दर्शन दरिद्रता को दूर करता है परन्तु संतजनों की संगति से पाप, ताप और दरिद्रता तीनों ही दूर हो जाते हैं ।

किसी संत से एक व्यक्ति ने प्रश्न किया कि भगवान कृष्ण सदैव मुस्कुराते क्यों रहते थे । उन्होंने बहुत ही सुंदर उत्तर दिया । संतश्री ने कहा क्योंकि वह निर्देशक थे । उन्हें सदैव यह पता रहता था कि आगे क्या होने वाला है । पूरी फिल्म ही उनके द्वारा निर्देशित की हुई थी । इसलिए उन्हें कुछ प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी।

महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ना तो कौरवों के पक्ष में थे और ना ही पांडवों के। भगवान तो थे केवल धर्म के पक्ष में। उनका अवतरण ही धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए होता है। भगवान ने तो बहुत प्रयास किया कि युद्ध ना हो, उन्हें भारी विनाश दिखाई दे रहा था, इसीलिए वह कौरवों के पास शांति प्रस्ताव लेकर गए परंतु उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया । आज के परिप्रेक्ष्य में भी यह बात बिलकुल सटीक बैठती है । इस समय भी जो महाभारत चल रही है, वो वास्तव में धर्म व अधर्म का ही युद्ध है । इसका स्वरूप जरूर बदला हुआ है क्योंकि युग अलग है ।

इस महाभारत में सद्गुरू रूपी भगवान जानते हैं कि जो कुछ भी चल रहा है इसका परिणाम क्या है । जैसे पांडव व कौरव दोनों ही भगवान के लिए बराबर थे, उसी तरह सद्गुरू के लिए भी सब बराबर हैं । फर्क है तो सिर्फ अपने कर्मों का । पांडव भगवान के अनुसार चले तो बचे रहे परंतु कौरव विपरीत चले और विनाश को प्राप्त हुए । इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है । भगवान का तो अर्थ ही है धर्म । अंततः जीत धर्म की ही होनी है, अधर्म चाहे कितना भी जोर लगा ले ।


Friday, 14 May 2021

हरिद्वार_महाकुंभ_2021

शाही स्नान - 12 अप्रैल (सोमवती अमावस्या)

प्रमुख स्नान -13 अप्रैल ( चैत्र शुक्ल प्रतिपदा)

शाही स्नान - 14 अप्रैल (मेष संक्रांति)

साध्वी रेखा दीदी की तीन दिवसीय सत्संग वर्षा व उपरोक्त तिथियों का लाभ लेने हेतु, आप भी सादर आमंत्रित हैं संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में।

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Friday, 12 February 2021

Parents Worship Day Celebrations - 11-February-2021

हरिद्वार में आज संतश्री आशारामजी बापू के साधकों द्वारा गंगा किनारे "मातृ-पितृ पूजन" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छोटे-छोटे बच्चे बड़े उत्साह के साथ इसमें सहभागी हुए और 14 फरवरी को भी इसे मनाने का संकल्प लिया।

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Thursday, 11 February 2021

Parents Worship Day - 14 February

"करते हैं जो मातृ-पितृ पूजन, धन्य हो जाता उनका जीवन।" पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के साधकों द्वारा हरिद्वार में गंगा किनारे आयोजित "मातृ-पितृ पूजन" कार्यक्रम में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।


दिनांक - 11 फरवरी
स्थान - गंगा किनारे, ठोकर नंबर- 1
सप्तसरोवर, हरिद्वार
समय - दोपहर 2 बजे से


Maa Dhari Devi Ji - Uttarakhand

उत्तराखंड में सात फरवरी को मां धारी देवी ने बरसाई कृपा। उस दिन हमने सुबह लगभग 11:30 बजे मंदिर के अंदर दर्शनों के लिए प्रवेश किया, पौने बारह बजे अनाउंसमेंट सुनाई दिया कि चमोली में ग्लेशियर फट गया है और पानी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, सभी लोग जल्दी से जल्दी मंदिर खाली कर दें। उस समय मंदिर के अंदर मां की डोली को सजाकर, पूजन-अर्चन के बाद कंधों पर उठाकर दूसरे गांव ले जाने की तैयारी थी। जैसे ही घोषणा हुई और लोगों ने डोली को कंधे पर उठाना चाहा तो आश्चर्य डोली का वजन इतना ज्यादा हो गया कि डोली हिलाई भी ना जा सकी। थोड़ी ही देर बाद माता की डोली को आराम से कंधों पर उठा लिया गया और रात दस बजे जब पानी मंदिर तक पहुंचा तो उसका स्तर काफी कम हो चुका था। मां धारी देवी मंदिर, बद्रीनाथ मार्ग पर श्रीनगर व रूद्रप्रयाग के बीच में स्थित है।


जानने योग्य बात यह है कि मां धारी देवी का प्राचीन मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित था परंतु डैम बनाने के लिये मंदिर को वहां से हटा दिया गया था। उत्तराखंड के निवासियों का मानना है कि 2013 में आई केदारनाथ आपदा मां के कोप का ही परिणाम थी। आपदा के बाद सरकार ने भी अपनी भूल को स्वीकार करते हुए, जिस जगह पर माता का प्राचीन मंदिर था, उसी जगह पर फिर से मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। आज यह जगह अलकनंदा के बीच में पड़ती है। भारतीय संस्कृति को हमारा शत्-शत् प्रणाम है, जहां भक्तों की आस्था और श्रद्धा ईश्वरीय शक्तियों को भी अपने प्रेम में बांध लेती है।


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Tapovani Mata Ji MahaSamadhi

महान तपस्विनी, सेवा के प्रति दृढ़ निष्ठावान, प्रेम की साक्षात मूर्ति, ब्रह्मलीन संत सुभद्रा माताजी को आज शाम 5 बजे उनके गंगोरी आश्रम, उत्तरकाशी में भू-समाधि दे दी गई। इस अवसर पर माताजी की गुरु बहन साध्वी उमा भारतीजी, आचार्य बालकृष्णजी व स्वामी राघवेंद्रजी उपस्थित रहे।

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Tapovani Mata Ji

हिन्दू धर्म की महान संत तपस्विनी सुभद्रा माताजी, जिन्हें तपोवनी मां भी कहा जाता था, नब्बे वर्ष की आयु में आज दोपहर हरिद्वार में महासमाधि में लीन हो गईं। माताजी के शरीर को भू-समाधि के लिये कल ले जाया जायेगा गंगोरी आश्रम, उत्तरकाशी।

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Haridwar Mahakhumbh - 2021

कुंभ स्नान में हरिद्वार आने वालों के लिये खुशखबरी। हजार अश्वमेघ व सौ वाजपेय यज्ञ तथा एक लाख बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने से जो फल मिलता है, वही फल एक बार कुंभ स्नान करने से प्राप्त हो जाता है।


इस बार हरिद्वार कुंभ_2021 में हरकी पौड़ी, ब्रह्मकुण्ड पर डुबकी लगाने की इच्छा रखने वाले वृद्ध व दिव्यांग जनों के लिये रोप-वे की तरह ही दो-दो हाईड्राॅलिक ट्रॉली लगाई जा रही हैं। इनके जरिये सड़क से सीधे हरकी पौड़ी, ब्रह्मकुण्ड तक पहुंचा जा सकेगा। साथ ही स्नान व पूजन के बाद वापिस भी आ सकेंगे।


हरकी पौड़ी, ब्रह्मकुण्ड सड़क से लगभग 14 फीट नीचे स्थित है। इस बार कोरोना महामारी के चलते कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को उसी दिन वापसी करनी पड़ सकती है। सरकार मेला क्षेत्र में कम से कम यात्रियों को ठहराने के पक्ष में है। फिलहाल मेला क्षेत्र में यात्रियों के लिये कैम्पिंग की आज्ञा नहीं है।


कुंभ में पड़ने वाले शाही व अन्य स्नानों की तिथियां 

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28 जनवरी - पौष पूर्णिमा

आज 28 जनवरी, पौष पूर्णिमा की आप सभी को हार्दिक बधाई। करते हैं संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार से चन्द्र दर्शन व पतित पावनी मां गंगा के दर्शन। 

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