संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में आज साध्वी तरुणा बहन के सान्निध्य में एक दिवसीय "विद्यार्थी उज्जवल भविष्य निर्माण शिविर" का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चे परमात्म ध्यान में तो डूबे ही साथ ही विभिन्न आध्यात्मिक खेल भी खेले। बच्चों ने बड़ दादा व आश्रम की गाय माता की प्रदक्षिणा भी की। दिन भर में बच्चों को सफल विद्यार्थी बनने के लिये पूज्य बापूजी द्वारा बताई गई वैदिक संस्कृति की अनेक युक्तियों से अवगत कराया गया। इस अवसर पर बच्चों ने लघु नाटिका प्रस्तुत की व पुरस्कार पाये।
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Sunday, 25 June 2017
Saturday, 24 June 2017
Sadhvi Taruna Bahen Vidyarthi Bhavishya Ujjwal Nirman Shivir at AshramHaridwar
संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में,
साध्वी तरुणा बहन के सान्निध्य में
"विद्यार्थी उज्जवल भविष्य निर्माण शिविर"।
दिनांक - 25 जून, रविवार
समय - सुबह 9 से शाम 5 बजे तक
Wednesday, 21 June 2017
International Yoga Day - Benefits of Shavasana
Param Pujya Saint Shri Asharam Bapu Ji states in HIS discourses that "Union with GOD is Yog. It is not merely a physical exercise but to know the Supreme Power through it is actual YOG."
Must watch the benefits of Shavasana: International Yoga Day
Tuesday, 20 June 2017
Press Coverage: Garbh Sanskar Kendra - Mahila Utthan Mandal
An appreciable effort by Mahila Utthan Mandal
संतश्री आशारामजी बापू की प्रेरणा से "महिला उत्थान मण्डल" द्वारा तेजस्वी व दिव्य संतान प्राप्ति हेतु देश भर में चलाये जा रहे "गर्भ संस्कार केन्द्र"
Press Coverage:
Yogini Ekadashi - योगिनी एकादशी
योगिनी एकादशी - 20 जून 2017
युधिष्ठिर ने पूछा : वासुदेव ! आषाढ़ के कृष्णपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है? कृपया उसका वर्णन कीजिये ।
भगवान श्रीकृष्ण बोले : नृपश्रेष्ठ ! आषाढ़ (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार ज्येष्ठ ) के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम ‘योगिनी’ है। यह बड़े - बडे पातकों का नाश करनेवाली है। संसार सागर में डूबे हुए प्राणियों के लिए यह सनातन नौका के समान है ।
अलकापुरी के राजाधिराज कुबेर सदा भगवान शिव की भक्ति में तत्पर रहने वाले हैं । उनका ‘हेममाली’ नामक एक यक्ष सेवक था, जो पूजा के लिए फूल लाया करता था । हेममाली की पत्नी का नाम ‘विशालाक्षी’ था । वह यक्ष कामपाश में आबद्ध होकर सदा अपनी पत्नी में आसक्त रहता था । एक दिन हेममाली मानसरोवर से फूल लाकर अपने घर में ही ठहर गया और पत्नी के प्रेमपाश में खोया रह गया, अत: कुबेर के भवन में न जा सका । इधर कुबेर मन्दिर में बैठकर शिव का पूजन कर रहे थे । उन्होंने दोपहर तक फूल आने की प्रतीक्षा की । जब पूजा का समय व्यतीत हो गया तो यक्षराज ने कुपित होकर सेवकों से कहा : ‘यक्षों ! दुरात्मा हेममाली क्यों नहीं आ रहा है ?’
यक्षों ने कहा: राजन् ! वह तो पत्नी की कामना में आसक्त हो घर में ही रमण कर रहा है । यह सुनकर कुबेर क्रोध से भर गये और तुरन्त ही हेममाली को बुलवाया । वह आकर कुबेर के सामने खड़ा हो गया । उसे देखकर कुबेर बोले : ‘ओ पापी ! अरे दुष्ट ! ओ दुराचारी ! तूने भगवान की अवहेलना की है, अत: कोढ़ से युक्त और अपनी उस प्रियतमा से वियुक्त होकर इस स्थान से भ्रष्ट होकर अन्यत्र चला जा ।’
कुबेर के ऐसा कहने पर वह उस स्थान से नीचे गिर गया । कोढ़ से सारा शरीर पीड़ित था परन्तु शिव पूजा के प्रभाव से उसकी स्मरणशक्ति लुप्त नहीं हुई । तदनन्तर वह पर्वतों में श्रेष्ठ मेरुगिरि के शिखर पर गया । वहाँ पर मुनिवर मार्कण्डेयजी का उसे दर्शन हुआ । पापकर्मा यक्ष ने मुनि के चरणों में प्रणाम किया । मुनिवर मार्कण्डेय ने उसे भय से काँपते देख कहा : ‘तुझे कोढ़ के रोग ने कैसे दबा लिया ?’
यक्ष बोला : मुने ! मैं कुबेर का अनुचर हेममाली हूँ । मैं प्रतिदिन मानसरोवर से फूल लाकर शिव पूजा के समय कुबेर को दिया करता था । एक दिन पत्नी सहवास के सुख में फँस जाने के कारण मुझे समय का ज्ञान ही नहीं रहा, अत: राजाधिराज कुबेर ने कुपित होकर मुझे शाप दे दिया, जिससे मैं कोढ़ से आक्रान्त होकर अपनी प्रियतमा से बिछुड़ गया । मुनिश्रेष्ठ ! संतों का चित्त स्वभावत: परोपकार में लगा रहता है, यह जानकर मुझ अपराधी को कर्त्तव्य का उपदेश दीजिये ।
मार्कण्डेयजी ने कहा: तुमने यहाँ सच्ची बात कही है, इसलिए मैं तुम्हें कल्याणप्रद व्रत का उपदेश करता हूँ । तुम आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत करो । इस व्रत के पुण्य से तुम्हारा कोढ़ निश्चय ही दूर हो जायेगा ।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: राजन् ! मार्कण्डेयजी के उपदेश से उसने ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत किया, जिससे उसके शरीर को कोढ़ दूर हो गया । उस उत्तम व्रत का अनुष्ठान करने पर वह पूर्ण सुखी हो गया ।
नृपश्रेष्ठ ! यह ‘योगिनी’ का व्रत ऐसा पुण्यशाली है कि अठ्ठासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने से जो फल मिलता है, वही फल ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत करनेवाले मनुष्य को मिलता है । ‘योगिनी’ महान पापों को शान्त करनेवाली और महान पुण्य फल देनेवाली है । इस माहात्म्य को पढ़ने और सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है ।
Monday, 19 June 2017
Rishi Prasad Sankalp by Shri Satish Bhai Ji at AshramHaridwar
संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में 18 जून को श्री सतीश भाईजी के सत्संग में साधकों ने "ऋषि प्रसाद" को घर-घर पहुंचाने का "शुभ संकल्प" भी लिया।
Saturday, 17 June 2017
Satish Bhai Ji Satsang at AshramHaridwar
परम पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के
शिष्य श्री सतीश भाईजी द्वारा आश्रम हरिद्वार में सत्संग
दिनांक - 18 जून, रविवार
समय - शाम 5 बजे से
Thursday, 15 June 2017
Saints - The Real Wealth
Hindu Saints make Hindu Dharma Great & Glorious. In fact they are our only real wealth. The world bows in front of them.
Tuesday, 18 April 2017
Pujya Asharam Ji Bapu Avataran Divas Celebrations at AshramHaridwar
पूज्य संतश्री आशारामजी बापू का "अवतरण दिवस" अर्थात् "विश्व सेवा दिवस" 17 अप्रैल को हरिद्वार आश्रम में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छोटी बच्चियों ने बहुत ही भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किया। इसके एक दिन पूर्व हर की पौड़ी मार्ग पर साधकों द्वारा नि:शुल्क शर्बत वितरण भी किया गया।
Sunday, 16 April 2017
Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu - Avataran Divas
"बधाई हो बधाई अवतरण दिवस की आपको बधाई "
आज जन्मदिन बापूजी का आया है देने को बधाई हर दिल गाया है
Param Pujya Sant Shri Asharamji Bapu, AshramHaridwar cordially invites you with family and friends to join us for : “81st AVATARAN DIVAS” of Sant Shri Asharamji Bapu on 17th April 2017 from 10:30 AM onwards:-
Monday, 10 April 2017
Sri Hanuman Jayanti
११ अप्रैल - हनुमान जयन्ती
"रामदूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।"
ग्यारहवें रुद्र पवनपुत्र हनुमानजी चैत्र की पूर्णिमा को अवतरित हुए थे और चिरंजीवी हैं। आइये आपको बताते हैं कि हनुमानजी आज भी भक्तों की मनोकामना कैसे पूर्ण करते हैं:-
हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा की 5 चौपाइयों का यदि नियमित सच्चे मन से वाचन किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती हैं। इसका वाचन मंगलवार या शनिवार को करना परम शुभ होता है। ध्यान रखें हनुमान चालीसा की इन चौपाइयों को पढ़ते समय उच्चारण में कोई गलती ना हो।
1- भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।
इस चौपाइ का निरंतर जाप उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसे किसी का भय सताता हो। इस चौपाइ का नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार जाप किया जाए तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
2- नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
यदि कोई व्यक्ति बीमारियों से घिरा रहता है, अनेक इलाज कराने के बाद भी वह सुख नही पा रहा, तो उसे इस चौपाइ का जाप करना चाहिए। इस चौपाइ का जाप निरंतर सुबह-शाम 108 बार करना चाहिए। इसके अलावा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, इससे जल्द ही व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है।
3- अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
यह चौपाइ व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। यदि किसी को भी जीवन में शक्तियों की प्राप्ति करनी हो, ताकि वह कठिन समय में खुद को कमजोर ना पाए तो नित्य रोज, ब्रह्म मुहूर्त में आधा घंटा इन पंक्तियों का जप करे, लाभ प्राप्त हो जाएगा।
4- विद्यावान गुनी अति चातुर। रामकाज करिबे को आतुर।।
यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो इन पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से व्यक्ति के धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।
5- भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।
जीवन में ऐसा कई बार होता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कार्य में विघ्न प्रकट होते हैं। यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो उपरोक्त दी गई चौपाइ का कम से कम 108 बार जप करें, लाभ होगा।
Thursday, 6 April 2017
Rate Card of Media
Indian Media is suffering from a deadly disease known as "Deficiency of Vitamin 'M'(Money)". What you have to do is pay them to cure them? If you don't pay them they will start polluting the entire nation with their sick mentality. They will start spreading the false news and fake stories about our Hindu Saints. Don't believe it?
You can check the #RateCardOfMedia
Tuesday, 4 April 2017
5 अप्रैल - श्रीरामनवमी (Ram Navami)
5 अप्रैल - श्रीरामनवमी
परम पूज्य संत श्रीआशाराम बापूजी सत्संग में बताते हैं कि रामजी को बचपन में दीक्षा मिली, बाद में शिक्षा के लिये गुरुकुल गये। रामजी सदैव सारगर्भित, मधुर व शास्त्रसम्मत बोलते थे। दूसरों को मान देने वाली वाणी बोलते थे और अपनों से छोटों का उत्साह बढ़ाते थे। राजदरबार में कभी वैमनस्य हो जाता तो रामजी किसी एक पक्ष को यह नहीं बोलते कि “तुम गलत हो, यह सही है।“ नहीं, जो सही है उनके पक्ष में रामजी उदाहरण देते, इतिहास बताते, पूर्वजनों की बात सुनाते। जो गलत होते वे अपने-आप उचित बात समझ जाते।
संसार–ताप से तप्त जीवों को,मर्यादा भूलकर राग-द्वेष और ईर्ष्या की अग्नि में स्वयं को जलाने वाले मानव को, मर्यादा से जीकर शीतलता पाने का संदेश देने वाले अवतार मर्यादापुरुषोत्तम श्रीरामावतार की आप सभी को खूब-खूब बधाई।
भगवान श्रीराम के प्रमुख ग्रन्थ "श्रीरामचरित मानस" में कुछ चौपाइयां ऐसी हैं जिनका विपत्तियों तथा संकट से बचाव और ऋद्धि-सिद्ध के लिए मंत्रोच्चारण के साथ पाठ किया जाता है। इन चौपाइयों को मंत्र की तरह विधि-विधान पूर्वक एक सौ आठ बार हवन की सामग्री से सिद्ध किया जाता है। हवन के लिये चंदन के बुरादे, जौ, चावल, शुद्ध केसर, शुद्ध घी, तिल, शक्कर, अगर, तगर, कपूर, नागर मोथा, पंचमेवा आदि का प्रयोग निष्ठापूर्वक मंत्रोच्चार के साथ करें:-
धन सम्पत्ति की प्राप्ति हेतु-
"जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं।
सुख सम्पत्ति नानाविधि पावहिं।।"
विद्या प्राप्ति के लिए-
"गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई।
अलपकाल विद्या सब आई।।"
ज्ञान प्राप्ति के लिए-
"छिति जल पावक गगन समीरा।
पंचरचित अति अधम शरीरा।।"
रोगों से बचनें के लिए-
"दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम काज नहिं काहुहिं व्यापा।।"
Sunday, 2 April 2017
Nation Demands #RemoveUnfairPOCSOlaw
PMO India Nation demands #RemoveUnfairPOCSOlaw because it has many loopholes to misuse and trap INNOCENTS.
Must Read:-
Monday, 27 March 2017
Somvati Amavasya
२७ मार्च - सोमवती अमावस्या
(सुबह 10:44 से 28 मार्च सूर्योदय तक)
इस दिन किया जाने वाला कोई भी शुभ कर्म जैसे जप, दान व मौनपूर्वक गंगास्नान, ध्यान, उपवास आदि अक्षय फलदायी होता है। शास्त्रों में यह अमावस्या दरिद्रता निवारक कही गयी है। तुलसीजी की 108 परिक्रमा व "श्रीहरि.....श्रीहरि...... श्रीहरि" का जप करने से धन की कमी दूर होती है। अगर माला से जप कर रहे हैं तो एक मनके पर तीन बार "श्रीहरि" मंत्र का जप करने से जप पूरा माना जाता है ऐसा करके ही माला आगे घुमायेँ - पूज्य बापूजी
Thursday, 23 March 2017
Papmochani Ekadashi
२४ मार्च - पापमोचनी एकादशी
महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से चैत्र (गुजरात / महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन ) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की, तो वे बोले : ‘राजेन्द्र ! मैं तुम्हें इस विषय में एक पापनाशक उपाख्यान सुनाऊँगा, जिसे चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश ने कहा था ।’
मान्धाता ने पूछा : भगवन् ! मैं लोगों के हित की इच्छा से यह सुनना चाहता हूँ कि चैत्र मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है, उसकी क्या विधि है तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया ये सब बातें मुझे बताइये ।
लोमशजी ने कहा : नृपश्रेष्ठ ! पूर्वकाल की बात है । अप्सराओं से सेवित चैत्ररथ नामक वन में, जहाँ गन्धर्वों की कन्याएँ अपने किंकरो के साथ बाजे बजाती हुई विहार करती हैं, मंजुघोषा नामक अप्सरा मुनिवर मेघावी को मोहित करने के लिए गयी । वे महर्षि चैत्ररथ वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते थे । मंजुघोषा मुनि के भय से आश्रम से एक कोस दूर ही ठहर गयी और सुन्दर ढंग से वीणा बजाती हुई मधुर गीत गाने लगी । मुनिश्रेष्ठ मेघावी घूमते हुए उधर जा निकले और उस सुन्दर अप्सरा को इस प्रकार गान करते देख बरबस ही मोह के वशीभूत हो गये । मुनि की ऐसी अवस्था देख मंजुघोषा उनके समीप आयी और वीणा नीचे रखकर उनका आलिंगन करने लगी । मेघावी भी उसके साथ रमण करने लगे । रात और दिन का भी उन्हें भान न रहा । इस प्रकार उन्हें बहुत दिन व्यतीत हो गये । मंजुघोषा देवलोक में जाने को तैयार हुई । जाते समय उसने मुनिश्रेष्ठ मेघावी से कहा: ‘ब्रह्मन् ! अब मुझे अपने देश जाने की आज्ञा दीजिये ।’
मेघावी बोले : देवी ! जब तक सवेरे की संध्या न हो जाय तब तक मेरे ही पास ठहरो। अप्सरा ने कहा : विप्रवर ! अब तक न जाने कितनी ही संध्याएँ चली गयीं ! कृपा करके बीते हुए समय का विचार तो कीजिये !
लोमशजी ने कहा : राजन् ! अप्सरा की बात सुनकर मेघावी चकित हो उठे । उस समय उन्होंने बीते हुए समय का हिसाब लगाया तो मालूम हुआ कि उसके साथ रहते हुए उन्हें सत्तावन वर्ष हो गये । उसे अपनी तपस्या का विनाश करनेवाली जानकर मुनि को उस पर बड़ा क्रोध आया । उन्होंने शाप देते हुए कहा: ‘पापिनी ! तू पिशाची हो जा ।’ मुनि के शाप से दग्ध होकर वह विनय से नतमस्तक हो बोली : ‘विप्रवर ! मेरे शाप का उद्धार कीजिये । सात वाक्य बोलने या सात पद साथ -साथ चलने मात्र से ही सत्पुरुषों के साथ मैत्री हो जाती है । ब्रह्मन् ! मैं तो आपके साथ अनेक वर्ष व्यतीत किये हैं, अत: स्वामिन् ! मुझ पर कृपा कीजिये ।’
मुनि बोले : भद्रे ! क्या करुँ ? तुमने मेरी बहुत बड़ी तपस्या नष्ट कर डाली है। फिर भी सुनो। चैत्र कृष्णपक्ष में जो एकादशी आती है उसका नाम है ‘पापमोचनी।’ वह शाप से उद्धार करने वाली तथा सब पापों का क्षय करने वाली है । सुन्दरी ! उसी का व्रत करने पर तुम्हारी पिशाचता दूर होगी ।
ऐसा कहकर मेघावी अपने पिता मुनिवर च्यवन के आश्रम पर गये । उन्हें आया देख च्यवन ने पूछा : ‘बेटा ! यह क्या किया ? तुमने तो अपने पुण्य का नाश कर डाला !’
मेघावी बोले : पिताजी ! मैंने अप्सरा के साथ रमण करने का पातक किया है । अब आप ही कोई ऐसा प्रायश्चित बताइये, जिससे पातक का नाश हो जाय ।
च्यवन ने कहा : बेटा ! चैत्र कृष्णपक्ष में जो ‘पापमोचनी एकादशी’ आती है, उसका व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जायेगा ।
पिता का यह कथन सुनकर मेघावी ने उस व्रत का अनुष्ठान किया । इससे उनका पाप नष्ट हो गया और वे पुन: तपस्या से परिपूर्ण हो गये । इसी प्रकार मंजुघोषा ने भी इस उत्तम व्रत का पालन किया । ‘पापमोचनी’ का व्रत करने के कारण वह पिशाच योनि से मुक्त हुई और दिव्य रुपधारिणी श्रेष्ठ अप्सरा होकर स्वर्गलोक में चली गयी ।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजन् ! जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करने वाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं । यह व्रत बहुत पुण्यमय है ।
Wednesday, 22 March 2017
"योगसिद्ध ब्रह्मनिष्ठ पूज्यपाद स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज"
२३ मार्च - अवतरण दिवस
"कुलं पवित्रं जननी कृतार्था, वसुन्धरा पुण्यवती च येन।"
"जिस कुल में महापुरुष अवतरित होते हैं वह कुल पवित्र, जिस माता के गर्भ से उनका जन्म होता है वह माता कृतार्थ एवं जिस जगह पर वे जन्म लेते हैं वह वसुन्धरा पुण्यशालिनी हो जाती है।"
बालक लीलाराम के बचपन की एक घटना है:-जिस गाँव में उनका जन्म हुआ था, वह महराब चांडाई नामक गाँव बहुत छोटा था। उस जमाने में दुकान में बेचने के लिए सामान टंडेबाग से लाना पड़ता था। उनके चाचा भाई लखुमल वस्तुओं की सूची एवं पैसे देकर बालक लीलाराम को खरीदी करने के लिए भेजते थे। एक समय मारवाड़ एवं थार में बड़ा अकाल पड़ा था। लखुमलजी ने पैसे देकर बालक लीलाराम को दुकान के लिए खरीदी करने को भेजा। लीलाराम खरीदी करके, माल-सामान की दो बैलगाड़ियाँ भरकर अपने गाँव लौट रहे थे। गाड़ियों में आटा, दाल, चावल, गुड़, घी आदि था। रास्ते में एक जगह पर गरीब, पीड़ित,अनाथ एवं भूखे लोगों ने लीलाराम को घेर लिया। दुर्बल एवं भूख से व्याकुल लोग जब अनाज के लिए गिड़गिड़ाने लगे तब लीलाराम का हृदय पिघल उठा। वे सोचने लगे, "इस माल को मैं भाई की दुकान पर ले जाऊँगा। वहाँ से खरीदकर भी मनुष्य ही खायेंगे न....! ये सब भी तो मनुष्य ही हैं। बाकी बची पैसे के लेन-देन की बात... तो प्रभु के नाम पर भले ये लोग ही खा लें।"
बालक लीलाराम ने बैलगाड़ियाँ खड़ी करवायीं और उन क्षुधापीड़ित लोगों से कहाः "यह रहा सब सामान। तुम लोग इसमें से भोजन बना कर खा लो।"
भूख से कुलबुलाते लोगों ने तो दोनों बैलगाड़ियों को तुरंत ही खाली कर दिया। लीलाराम भय से काँपते, थरथराते गाँव पहुँचे। खाली बोरों को गोदाम में रख दिया। कुँजियाँ चाचा लखुमल को दे दीं।
लखुमलजी ने पूछाः"माल लाया?"
"हाँ।"
"कहाँ है?"
"गोदाम में।"
"अच्छा बेटा ! जा, तू थक गया होगा। सामान का हिसाब कल देख लेंगे।"
दूसरे दिन लीलाराम दुकान पर गये ही नहीं। उन्हें तो पता था कि गोदाम में क्या माल रखा है। वे घबराये, काँपने लगे। उनको काँपते हुए देखकर लखुमल ने कहाः "अरे ! तुझे बुखार आ गया? आज घर पर ही आराम कर।"
एक दिन.... दो दिन.... तीन दिन..... बालक लीलाराम बुखार के बहाने दिन बिता रहे हैं और भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं:-
"हे भगवान! अब तो तू ही जान। मैं कुछ नहीं जानता। हे करन-करावनहार स्वामी! तू ही सब कराता है। तूने ही भूखे लोगों को खिलाने की प्रेरणा दी। अब सब तेरे ही हाथ में है, प्रभु ! तू मेरी लाज रखना। मैं कुछ नहीं, तू ही सब कुछ है...."
एक दिन शाम को लखुमलजी अचानक लीलाराम के पास आये और बोलेः''लीला.... लीला ! तू कितना अच्छा माल लेकर आया है !"
लीलाराम घबराये। काँप उठे कि "अच्छा माल.... अच्छा माल कहकर अभी लखुमल मेरे कान पकड़कर मारेंगे।" वह हाथ जोड़कर बोलेः"मेरे से गलती हो गयी।"
"नहीं बेटा ! गलती नहीं हुई। मुझे लगता था कि व्यापारी तुझे कहीं ठग न लें। ज्यादा कीमत पर घटिया माल न पकड़ा दें किन्तु सभी चीजें बढ़िया हैं। पैसे तो नहीं खूटे ना?"
"नहीं, पैसे तो पूरे हो गये और माल भी पूरा हो गया।""माल किस तरह पूरा हो गया?"
बालक लीलाराम जवाब देने में घबराने लगे तो लखुमल ने कहाः "नहीं बेटा ! सब ठीक है। चल, तुझे बताऊँ।"
ऐसा कहकर लखुमलजी लीलाराम का हाथ पकड़कर गोदाम में ले गये। लीलाराम ने वहाँ जाकर देखा तो सभी खाली बोरे माल-सामान से भरे हुए मिले ! उनका हृदय भावविभोर हो उठा और गदगद होते हुए उन्होंने परमात्मा को धन्यवाद दियाः "प्रभु ! तू कितना दयालु है.... कितना कृपालु है !"
लीलाराम जी ने तुरंत ही निश्चय कियाः "जिस परमात्मा ने मेरी लाज रखी है.... गोदाम में बाहर से ताला होने पर भी भीतर के खाली बोरों को भर देने की जिसमें शक्ति है, अब मैं उसी परमात्मा को खोजूँगा..... उसके अस्तित्व को जानूँगा.... उसी प्यारे को अब अपने हृदय में प्रकट करूँगा।"
कैसे बने बालक लीलाराम से साईं लीलाशाहजी महाराज?
पढ़िये - "जीवन सौरभ"- साईं लीलाशाहजी महाराज की जीवनकथा।
Tuesday, 21 March 2017
निगुरा होता हिय का अँधा
निगुरा होता हिय का अन्धा,
खूब करे संसार का धन्धा।
जम का बने मेहमान,
निगुरे नहीं रहना
"One who is without a Guru is blind within. He remains engrossed in the worldly affairs and finally falls prey to YAMA. One should never remain without a SADGURU"
Sunday, 19 March 2017
किसमें करें आस्था और किसका करें विवेक?
"किसमें करें आस्था और किसका करें विवेक?"
पूज्य संतश्री आशाराम बापूजी का एक और गहरा सत्संग।
अवश्य सुनें :-
Thursday, 16 March 2017
संत आशारामजी बापू मामले पर बोले "ईशा फाउंडेशन" के सद्गुरु-जग्गी वासुदेव "मीडिया की भूमिका संदिग्ध।"
Arnab Goswami asks "Sadhguru" - Jaggi Vasudev to speak on Sant Shri
Asharam Bapu Ji at Rotary Club's event, Delhi on 6th March 2017.
I have never met Asharam Bapu. I only saw him on the news channels. and.....I...
I mean if law of the country is taking charge of it, it's not for me to make
comments because I know the local media, where I live, in the last 25 years,
they have been running certain segments, not everybody, certain segments of the
media, you know I have stolen 7000 Kidneys, I killed over 100 elephants and I
have destroyed an entire rain forest and anything that a man can do and cannot
do I have done ok... so when this is happening to me, I don't want to comment
about somebody, we don't know whats happening to them because in this country
anybody can write anything, say anything because there is no way to fix them
with law, there is no defamatory stuff that you can do and I am telling you
mean stream television channels in TamilNadu have said I have stolen 7000
Kidneys. I said at least increase the number for my stature, at least make it 7
lacs or 70 lacs, why 7000... you are just degrading me and that guy comes, you
know, journalist comes and asks me is it true that you are exporting Kidneys to
America. I said no I am having for breakfast. so when I see this I don't want
to comment on somebody because we don't know who is running for them...
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