"योग कराये परमात्मा
से संयोग" - अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस।
How to live a healthy & long life? #LightingUpYourLives
with the teachings and Spiritual Discourses of Pujya Asharam Ji Bapu. He is a
#SaintForHumanity indeed.
पूज्य संतश्री आशारामजी बापू
ने वैदिक भारतीय
संस्कृति का पुर्नजागरण करने
हेतु जिस गुरूकुल परम्परा
का फिर से
आरम्भ किया, उन गुरूकुलों
के विद्यार्थी जीवन
के हर क्षेत्र
में निरन्तर बुलन्दियों को
छू रहे हैं।
इससे समाज में जागरूकता
तो आ ही
रही है साथ ही
अन्य विद्यालय भी अपने
विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य
के लिये इस
वैदिक पद्धति को अपनाने
लगे हैं।
पूज्यबापूजीकेसाधकइससेवामेंभीपीछेनहींहैं।वेविद्यालयोंमेंजा-जाकरविद्यार्थियोंकोपूज्यबापूजीकादियाखजाना
"योग व उच्च
संस्कार" बाँटरहेहैं।
Must Watch:
"Yog aur Uchh Sanskar" program in MOUNT MARRY SCHOOL, Haridwar by the disciples of Sant Shri Asharam Ji Bapu:
Param Pujya Saint Shri Asharam Bapu Ji states in HIS discourses that "Union with GOD is Yog. It is not merely a physical exercise but to know the Supreme Power through it is actual YOG."
Must watch the benefits of Shavasana: International Yoga Day
हमारी शारीरिक व मानसिक आरोग्यता का आधार हमारी जीवनशक्ति है। इसे ‘प्राण-शक्ति’ भी कहते हैं। हमारे जीवन जीने के ढंग के अनुसार हमारी जीवनशक्ति का ह्रास या विकास होता है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास कहा गया है | पूज्य बापूजी बताते हैं : ” जिसका शरीर स्वस्थ नहीं रहता उसका मन अधिक विकारग्रस्त होता है | इसलिये रोज प्रातः व्यायाम एवं आसन करने का नियम बना लो | रोज प्रातः काल 3-4 मिनट दौड़ने और तेजी से टहलने से भी शरीर को अच्छा व्यायाम मिल जाता है | सूर्यनमस्कार किया करो तो उत्तम है | इसमें आसन व व्यायाम दोनों का समावेश होता है | व्यायाम का अर्थ पहलवानों की तरह मांसपेशियाँ बढ़ाना नहीं है | शरीर को योग्य कसरत मिल जाय ताकि उसमें रोग प्रवेश न करें और शरीर तथा मन स्वस्थ रहें – इतना ही हेतु है | व्यायाम से भी अधिक उपयोगी आसन हैं | आसन शरीर के समुचित विकास एवं ब्रह्मचर्य-साधना के लिये अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं | इनसे नाड़ियाँ शुद्ध होकर सत्त्वगुण की वृद्धि होती है | वैसे तो शरीर के अलग-अलग अंगों की पुष्टि के लिये अलग-अलग आसन होते हैं, परन्तु मयूरासन, पादपश्चिमोत्तानासन, सर्वांगासन आदि थोड़ी बहुत सावधानी रखकर हर कोई कर सकता है | इनमें से पादपश्चिमोत्तानासन तो बहुत ही उपयोगी है |