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Thursday, 28 May 2020

As is your food, so is your mind

As is your food, so is your mind.

"जैसा खायें अन्न, वैसा होय मन।"


साधकों के लिये तो ग्रहण किये जाने वाले अन्न पर ध्यान देना आवश्यक है ही परंतु जो लोग साधना नहीं करते उनके लिए भी अन्न का शुद्ध, सात्विक और नेक कमाई का होना अत्यंत आवश्यक है।


पांच कारणों से भोजन अशुद्ध माना जाता है।
आय का अनुचित स्त्रोत, अशुद्ध स्थान, भोजन में प्रयोग की जाने वाली अशुद्ध वस्तुएं, प्रभाव व आकस्मिक कारक। इन कारणों से अपने को विशेष रूप से बचाकर, ग्रहण किये जाने वाले अन्न का मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है तथा साधना में भी बरकत आती है। असीम शांति व आनन्द मिलता है। मन दिव्य संस्कारों से भर जाता है।


Pure Sattvik food like rice, wheat flour, moong, ghee, milk & vegetables like lauki, parval, karela, turai are recommended in the summer by Pujya Sant Shri Asharamji Bapu.


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Thursday, 21 June 2018

21-June #InternationalYogaDay2018


21-June #InternationalYogaDay2018 
"योग कराये परमात्मा से संयोग" - अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस।

How to live a healthy & long life? #LightingUpYourLives with the teachings and Spiritual Discourses of Pujya Asharam Ji Bapu. He is a #SaintForHumanity indeed.

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Tuesday, 13 June 2017

कैसे जी सकते हैं स्वस्थ व लम्बा जीवन

"धर्म की पहचान, संतों का ज्ञान"


#हिन्दू_धर्म_की_महानता हिन्दू संतों से ही है यह बात अब पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। विश्व बंधुत्व की बात हो या आपसी भाईचारे की, मानवमात्र के स्वास्थ्य की बात हो या सर्वत्र प्रेम व सौहार्द की बात हिन्दू धर्म में सभी का समावेश है। एक हिन्दू ही यह प्रार्थना कर सकता है :-
"सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:ख भागभवेत।

ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः।"


अर्थात् "सभी सुखी होंं, सभी निरोगी रहें, सभी मङ्गलमय घटनाओं के साक्षी बनें तथा किसी को भी दुःख का भागी ना बनना पड़े। सर्वत्र शांति का साम्राज्य हो।"

"कैसे जी सकते हैं स्वस्थ व लम्बा जीवन"- जानिये बापूजी से:-