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Sunday, 26 July 2020

Food For Thought - P.P.S.S. Asharamji Bapu

"WE BECOME MISERABLE WHEN WE FORGET OUR TRUE SELF" - Pujya Sant Shri Asharamji Bapu


It is not difficult to attain God or eternal bliss but our desires and the cobweb of impressions created in the mind through our previous experiences make us feel removed from God and bliss, thus we remain oblivious of our own capabilities.


Only desires and lust make us miserable and wretched. They make us fall from our true greatness. The more we feel the want of external things and desires for sense enjoyments, the more we enslave ourselves to nature. And the more we free ourselves from desires, nature become favorable to us.

Thursday, 28 May 2020

As is your food, so is your mind

As is your food, so is your mind.

"जैसा खायें अन्न, वैसा होय मन।"


साधकों के लिये तो ग्रहण किये जाने वाले अन्न पर ध्यान देना आवश्यक है ही परंतु जो लोग साधना नहीं करते उनके लिए भी अन्न का शुद्ध, सात्विक और नेक कमाई का होना अत्यंत आवश्यक है।


पांच कारणों से भोजन अशुद्ध माना जाता है।
आय का अनुचित स्त्रोत, अशुद्ध स्थान, भोजन में प्रयोग की जाने वाली अशुद्ध वस्तुएं, प्रभाव व आकस्मिक कारक। इन कारणों से अपने को विशेष रूप से बचाकर, ग्रहण किये जाने वाले अन्न का मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है तथा साधना में भी बरकत आती है। असीम शांति व आनन्द मिलता है। मन दिव्य संस्कारों से भर जाता है।


Pure Sattvik food like rice, wheat flour, moong, ghee, milk & vegetables like lauki, parval, karela, turai are recommended in the summer by Pujya Sant Shri Asharamji Bapu.


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Tuesday, 12 May 2020

अन्न की कमी को करता दूर सबके भंडार रखे भरपूर

"अन्न की कमी को करता दूर, सबके भंडार रखे भरपूर।"

एक ओर कोरोना महामारी का प्रकोप, तो दूसरी तरफ लॉकडाऊन के कारण सब कुछ बंद। अब अनाज की कमी से लोग परेशान होने लगे हैं। कई जगहों पर रूपये देकर भी अनाज नहीं मिल रहा।

ऐसे में पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के सत्संगों में, अनाज के भंडार को भरपूर करने के लिये बताये गये निम्न मंत्र द्वारा इस परेशानी से, आसानी से बचा जा सकता है:


Wednesday, 15 April 2020

15 अप्रैल- बुधवारी अष्टमी

15 अप्रैल- बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से शाम 4:51 तक)। इस दिन किये जाने वाले जप, तप, ध्यान, दान व मौन आदि का अनन्त गुना फल होता है।

आज से हम शुरू करने जा रहे हैं एक नई श्रृंखला। इसमें परम पूज्य संतश्री आशारामजी बापू द्वारा बताई गई उन 10 असावधानियों से आपको अवगत कराया जायेगा, जो साधना में बड़ी रूकावट हैं। तो आईये, लॉकडाऊन के इस अवसर का लाभ उठायें और जानें- कैसे बचा जा सकता है इन असावधानियों से।

Sant Shri Asharamji Bapu says- "Keep your pure intellect ever engaged in Spiritual practices towards God-realization. Never worry about irrelevant things. Keep your senses ever engaged exclusively in objects of Spiritual value in furtherance of your Sadhana."

The following 10 points would help you evaluate and bring due rectifications in your lifestyle to make your life truly great:

THE FIRST POINT: What type of books do you read? Do you go for literature on health or novels related to theft, robbery, share market etc. Do you read obscene books that corrupt your mind? Do you study Holy Scriptures like Vedas and Vedanta or those that sing praises of God?

Your life will be dominated by tamas if you read literature that induces tamas, by rajas if you study literature with predominance of rajas and by sattva, if you read and reflect on literature inducing qualities of sattva. If you read scriptures related to God, it will bring God into your life.

Hence you should read such literature as helps develop in you, the Divine qualities like virtuous behaviour, affection, purity, fearlessness, humility, fellow-feeling etc. to make you a great person.

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Tuesday, 23 January 2018

ज्ञान के मोती - पूज्य संतश्री आशारामजी बापू

कैसे करें शक्ति की वृद्धि

"जिस शक्तिमान परमात्मा से शक्ति मिलती है उसके विधान का ध्यान रखकर शुभकर्म करना, दूसरों की सेवा व सहायता करना,किसी को अपनी शक्ति से दु:ख ना देना व दु:खी को मर्यादा के भीतर सुख देते रहना यही शक्ति की उपासना व आदर है।"

Tuesday, 9 January 2018

Food For Thought by Pujya Asharam Ji Bapu

💎💎 Pearls of Wisdom by Pujya Asharam Ji Bapu 💎💎

As soon as you avail yourself of the power of Divine Grace, fortune begins to smile at you, the clouds of misery dissipate and the tendency to feel desperate and helpless is completely eradicated.

Blessed are the ones, at whom Saints look with a benign glance.

Thursday, 4 January 2018

~★★~ ज्ञान के मोती ~★★~ Pujya Asharam Ji Bapu


जहाँ सच्चा प्रेम होता है वहाँ दोष दर्शन नहीं होता।

आपका जितना सामर्थ्य है उसका सदुपयोग किया तो वह व्यापक होता जायेगा और दुरूपयोग किया तो लघु होता जायेगा।

मौन रहने से अंदर का आनंद प्रकट होता है व धैर्य, क्षमा, शांति आदि सद्गुणों का विकास होता है। - पूज्य आशारामजी बापू

Wednesday, 5 July 2017

Pearls of Wisdom by Pujya Asharam Ji Bapu

“जिसने आत्मा को अपने ही स्वरूप से जान लिया, उसकी बस आत्मा में ही प्रीति, आत्मा में ही तृप्ति व आत्मा में ही संतुष्टि होती है। वह कृतकृत्य हो जाता है। उसको कुछ करना शेष नहीं रहता है, कुछ पाना शेष नहीं रहता है। आत्मा को जानने से कुछ भी अप्राप्त नहीं रहता। आत्मा तो अमृतरूप है। आत्मा की मृत्यु तो होती ही नहीं फिर मृत्यु से बचने के लिये और अमरत्व की प्राप्ति के लिये कौन सा कर्म करना है? अमरत्व तो नित्य प्राप्त ही है। कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं, कोई जटिल साधन करने की जरूरत नहीं। वह तो अपना आपा ही है, जो स्वयं ज्ञानस्वरूप है परम प्रकाशरूप है”

Monday, 24 April 2017

Pearls of Wisdom - Mukti Ka Sahaj Marg (मुक्ति का सहज मार्ग )


एक व्यक्ति किसी प्रसिद्ध संत के पास गया और उनसे बोला, “महात्मन् ! मुझे मुक्ति का उपाय बताइये। संत ने कहा, “श्मशान में जाओ, कब्रिस्तान में जाओ और कब्रों को खूब गालियाँ निकाल कर आओ।“ उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया। दूसरे दिन संत ने कहा, “आज जाओ और कब्रों की खूब प्रशंसा व स्तुति कर के आओ।“ उस व्यक्ति ने फिर ऐसा ही किया। इस बार जब वह संत के पास गया तो संत ने पूछा, “किसी कब्र ने तुम्हें कुछ कहा?” व्यक्ति बोला, “नहीं महात्मन् ! किसी कब्र ने कोई जवाब नहीं दिया।“ संत मुस्कुराये और बोले, “जब तुम इस अवस्था में पहुँच जाओ अर्थात् किसी भी अवस्था में जब तुम्हारी कोई प्रतिक्रिया ना हो तो समझना तुम मुक्ति के अधिकारी हो।“ 

Tuesday, 21 March 2017

निगुरा होता हिय का अँधा


निगुरा होता हिय का अन्धा, 
खूब करे संसार का धन्धा।
जम का बने मेहमान, 
निगुरे नहीं रहना


"One who is without a Guru is blind within. He remains engrossed in the worldly affairs and finally falls prey to YAMA. One should never remain without a SADGURU" 

Wednesday, 15 March 2017

Whom do you ruminate on within your heart?


Whom do you ruminate on within your heart? Whom do you think about in your mind? What is the first thought that comes to your mind when you wake up from your sleep in the middle of night?

Pujya Asharam Bapuji states in his discourses, "Watchfulness is the key to Sadhana. Be alert throughout the day, even while working, so as not to allow unsavoury thoughts or resolves to creep in for any rhyme or reason. Never be lenient towards any of your faults, shortcomings or depraved thinking. You must not overlook your vices rather do expiate them without fail by administering some sort of punishment on yourself."

He says, "Our actions themselves reflect whether pure and auspicious thoughts are increasing. If our behaviour and actions are becoming virtuous, our life is progressing towards Real Happiness."



Saturday, 28 January 2017

Pearls of Wisdom by H. D. H. Asharam Bapu Ji

अपने को कष्ट देकर भी दूसरों का मंगल करना यह तपस्या है और महापुरुषों का सहज स्वभाव है।


Tuesday, 3 January 2017

Food for Thought by H. D. H. Asharam Bapu Ji

"भगवत्प्राप्ति के उद्देश्य से किया हुआ जप दोषों को मिटाता है और पुण्यों को बढाता है।" #बापूजी
 
"हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
 हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।"
 

Wednesday, 28 December 2016

In the middle of every difficulty, lies opportunity

"हजारों प्रतिकूलताओं में भी जो निराश नहीं होता वह अवश्य विजयी होता है। निराशा व कायरता तो कमजोर लोगों की पहचान है। सत्संग सुनकर असफलताओं के सिर पर पैर रखो और आगे बढ़ो।"


हरि ॐ......हरि ॐ......हरि ॐ.........

 

Tuesday, 29 November 2016

हर परिस्थिति में अचूक मंत्र

साक्षीभाव, असंगता वास्तव में एक ऐसा मंत्र है जो हर परिस्थिति में अचूक है। यह जिसके जीवन में आ जाता है वह दुनिया की सारी परिस्थितियों के सिर पर पैर रखकर सद्गुरु कृपा से अपने परमात्म - स्वरूप, ब्रह्मस्वरूप को पा लेता है।

 

जीवन में जो भी हो रहा है उस पर प्रतिक्रिया किये बिना यदि हम उसे देखते जायें और अपना सहज कर्म करते जायें तो शीघ्र ही उस मंजिल पर पहुँच सकते हैं ।

 

Wednesday, 16 November 2016

Param Shanti - Satsang Discourse by Asharam Bapu Ji

सत्संग से जितना लाभ होता है उतना किसी कोर्स और तपस्या से भी नहीं होता। इसलिए सत्संग देने वाले अनुभवी सत्पुरुषों का जितना आदर करें उतना कम है। उनकी आज्ञा के अनुसार जितना जीवन ढालें उतना ही अपना मंगल है। सत्संग से पाँच लाभ तो सहज में होने लगते हैं :-

1. भगवन्नाम के जप – कीर्तन का लाभ मिलकर भगवान की महिमा सुनने को मिलती है।

2. भगवान के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान मिलता है।

3. भगवद ध्यान एवं सेवा का स...दगुण विकसित होने लगता है।

4. बुद्धि में ईश्वर व ईश्वर प्राप्त महापुरुष के विलक्षण लक्षण विकसित होने लगते हैं।

5. अच्छा संग मिलता है।

पूज्य बापूजी कहते हैं, "वास्तविक आराम (परमात्म – विश्रांति) पाने के लिये ही मनुष्य जन्म मिला है, नींद तो भैंसा भी कर लेता है और यह परमात्म - विश्रांति केवल सत्संग से ही संभव है अत: सत्संग अवश्य करना चाहिये।"


 

Tuesday, 18 October 2016

तुम्हारी खुद की निष्ठा

कल शाम पूज्य गुरुदेव की कृपा से उच्चकोटि के संत के दर्शन सान्निध्य का लाभ मिला। सत्संग हुआ। सभी अपनी जिज्ञासा व्यक्त कर रहे थे। हमसे भी अपनी जिज्ञासा व्यक्त करने को कहा गया। हमने पूछा कि ईश्वर कृपा या गुरु कृपा तो सबके ऊपर होती है पर किसी-किसी के ऊपर जो "विशेष कृपा" होती है उसका क्या कारण होता है?

संत मुस्कुराये और बोले, इसका कारण है - "तुम्हारी खुद की निष्ठा"। गुरु के प्रति जिसकी जितनी "निष्ठा" उतना ही वह "गुरुकृपा" का अधिकारी। किसी भी परिस्थिति में कोई भी गुरु के प्रति शिष्...य की निष्ठा को हिला ना सके शिष्य को ऐसा होना चाहिये।"

आज ही हमें आनंदमूर्ति गुरुमाँ का यह VIDEO मिला, जिसमें उन्होने भी यही बात कही है।






 

Thursday, 29 September 2016

Pearls of Wisdom by H. H. Asharam Bapu Ji

जिस समाज में जितना सत्संग और संत सान्निध्य होता है, वह समाज उतना ही प्रभावशाली व उन्नत होता है। सादगी, सच्चाई व संयम से जीने से मनोबल बढ़ता है और आभा भी बढ़ती है। जीवन दिव्य हो जाता है। यह दिव्यता सत्संग ही लाता है।

Thursday, 22 September 2016

Importance of Mantra Jap

मंत्र जप का प्रभाव सूक्ष्म व गहरा होता है। जब लक्ष्मणजी ने मंत्र जप कर सीताजी की कुटीर के चारों तरफ भूमि पर एक रेखा खींच दी तो लंकाधिपति रावण तक उस लक्ष्मणरेखा को ना लाँघ सका | यद्यपि रावण मायावी विद्याओं का जानकार था किंतु ज्यों ही वह रेखा को लाँघने की इच्छा करता त्यों ही उसके सारे शरीर में जलन होने लगती थी|

मंत्रजप से पुराने संस्कार हटते जाते हैं, जापक में सौम्यता आती है और उसका आत्मिक बल बढ़ता... जाता है | इससे चित्त पावन होने लगता है | रक्त के कण पवित्र होने लगते हैं | दुःख, चिंता, भय, शोक, रोग आदि निवृत होकर, सुख-समृद्धि और सफलता की प्राप्ति में मदद मिलने लगती है | मंत्रजप करने से मनुष्य के अनेक पाप-ताप भस्म होकर उसका हृदय शुद्ध होने लगता है तथा ऐसा करते-करते एक दिन उसके हृदय में परमात्मा का प्राकटय भी हो जाता है|

मंत्रजापक को व्यक्तिगत जीवन में सफलता तथा सामाजिक जीवन में सम्मान मिलता है | मंत्रजप मानव के भीतर की सोयी हुई चेतना को जगाकर उसकी महानता को प्रकट कर देता है| 


 " जपात् सिद्धिः जपात् सिद्धिः जपात् सिद्धिर्न संशयः।"

 

Sunday, 11 September 2016

Power of Satsang

"खिला-पिला के देह बढाई वह भी अग्नि में जलाना है,
कर सत्संग अभी से प्यारे नहीं तो फिर पछताना है।"