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Thursday, 28 May 2020

As is your food, so is your mind

As is your food, so is your mind.

"जैसा खायें अन्न, वैसा होय मन।"


साधकों के लिये तो ग्रहण किये जाने वाले अन्न पर ध्यान देना आवश्यक है ही परंतु जो लोग साधना नहीं करते उनके लिए भी अन्न का शुद्ध, सात्विक और नेक कमाई का होना अत्यंत आवश्यक है।


पांच कारणों से भोजन अशुद्ध माना जाता है।
आय का अनुचित स्त्रोत, अशुद्ध स्थान, भोजन में प्रयोग की जाने वाली अशुद्ध वस्तुएं, प्रभाव व आकस्मिक कारक। इन कारणों से अपने को विशेष रूप से बचाकर, ग्रहण किये जाने वाले अन्न का मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है तथा साधना में भी बरकत आती है। असीम शांति व आनन्द मिलता है। मन दिव्य संस्कारों से भर जाता है।


Pure Sattvik food like rice, wheat flour, moong, ghee, milk & vegetables like lauki, parval, karela, turai are recommended in the summer by Pujya Sant Shri Asharamji Bapu.


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Thursday, 19 October 2017

19 October 2017 - Happy Diwali

Spiritual aspects of Diwali:

The lamplight is hot, it may burn but when a Sadguru kindles the light of Knowledge in your heart, it burns not things but sins and illumines your life, brings peace and happiness.

The worldly celebrations of Diwali give us worldly pleasure. Fortunate are the ones who through the medium of worldly Diwali, prepare themselves for the celebration of spiritual Diwali.

दिवाली में करने योग्य:-

दीपावली की रात भर घी का दिया जले सूर्योदय तक, तो बड़ा शुभ माना जाता है |

दीपावली के दिन चांदी की कटोरी में अगर कपूर को जलायें, तो परिवार में तीनों तापों से रक्षा होती |

हर अमावस्या को (और दिवाली को भी) पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं तथा घर में अच्छी आत्माएं जन्म लेती हैं |

नूतन वर्ष के दिन (दीपावली के अगले दिन ), गाय के खुर की मिट्टी से अथवा तुलसीजी की मिट्टी से तिलक करें, सुख-शान्ति में बरकत होगी|

दीपावली की शाम को अशोक वृक्ष के नीचे घी का दिया जलायें, तो बहुत शुभ माना जाता है |


Monday, 10 April 2017

Sri Hanuman Jayanti


११ अप्रैल - हनुमान जयन्ती


"रामदूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।"

ग्यारहवें रुद्र पवनपुत्र हनुमानजी चैत्र की पूर्णिमा को अवतरित हुए थे और चिरंजीवी हैं। आइये आपको बताते हैं कि हनुमानजी आज भी भक्तों की मनोकामना कैसे पूर्ण करते हैं:-

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा की 5 चौपाइयों का यदि नियमित सच्चे मन से वाचन किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती हैं। इसका वाचन मंगलवार या शनिवार को करना परम शुभ होता है। ध्यान रखें हनुमान चालीसा की इन चौपाइयों को पढ़ते समय उच्चारण में कोई गलती ना हो।

1- भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।

इस चौपाइ का निरंतर जाप उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसे किसी का भय सताता हो। इस चौपाइ का नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार जाप किया जाए तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।

2- नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

यदि कोई व्यक्ति बीमारियों से घिरा रहता है, अनेक इलाज कराने के बाद भी वह सुख नही पा रहा, तो उसे इस चौपाइ का जाप करना चाहिए। इस चौपाइ का जाप निरंतर सुबह-शाम 108 बार करना चाहिए। इसके अलावा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, इससे जल्द ही व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है।

3- अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।

यह चौपाइ व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। यदि किसी को भी जीवन में शक्तियों की प्राप्ति करनी हो, ताकि वह कठिन समय में खुद को कमजोर ना पाए तो नित्य रोज, ब्रह्म मुहूर्त में आधा घंटा इन पंक्तियों का जप करे, लाभ प्राप्त हो जाएगा।

4- विद्यावान गुनी अति चातुर। रामकाज करिबे को आतुर।।

यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो इन पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से व्यक्ति के धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।

5- भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।

जीवन में ऐसा कई बार होता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कार्य में विघ्न प्रकट होते हैं। यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो उपरोक्त दी गई चौपाइ का कम से कम 108 बार जप करें, लाभ होगा।

Thursday, 1 September 2016

Good Habits - Before Going to Bed

A Child can learn all good Techniques or good Sanskaars of life in "Bal Sanskaar Kendra", an initiative by #AsharamBapuJi.

Why To Run " Bal Sanskar Kendra " ?

The real way to fortify the true grandeur of a family, society or nation is to embolden the children and students thereof.

Childhood is the time when seeds of good character can be easily sown as children’s minds are clear, unbiased and impressionable.

" कलियाँ महके बनके फूल ! संस्कार बनते जीवन का मूल!!"

The objective of Bal Sanskaar Kendra is All - Round Development of The Children and The Nation.

- Param Pujya Sant Sri Asharam Ji Bapu