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Sunday, 17 November 2019

Press Release - Karthik Purnima 2019

Another activity by the devotees of Asaram Bapu Ji, shows their determination and contribution to the society.

कार्तिक पूर्णिमा पर #हरिद्वार में भव्य यात्रा। भगवन्नाम कीर्तन से पावन हुई धर्मनगरी।





Sankirtan Yatra at Haridwar

कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर संतश्री आशारामजी बापू आश्रम हरिद्वार में, श्रीरामा भाई के सान्निध्य में सत्संग तथा विशाल संकीर्तन यात्रा का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम रामा भाई द्वारा पूज्य गुरुदेव की पादुका पूजन हुआ, तत्पश्चात् "बाल संस्कार केंद्र" के बच्चों को पुरस्कार वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में हरिपुर कलाँ क्षेत्र की नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान, श्रीमती गीतांजलि जखमोला व भारतीय जनता पार्टी, युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष श्रीमनोज जखमोला भी सम्मिलित हुए। प्रस्तुत है कुछ तस्वींरें 👇

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Monday, 11 November 2019

कार्तिक पूर्णिमा -12 नवंबर

"आनंद अपार मेरे सद्गुरु के दरबार में"।

कार्तिक पूर्णिमा पर #हरिद्वार में पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के शिष्य श्रीरामा भाई के सान्निध्य में विशाल संकीर्तन यात्रा।

स्थान- हरिपुर कलाँ आश्रम से आरंभ।

समय- दोपहर 2 बजे से।

Let's learn #HowToDetoxifyAir with "Harinaam Sankirtan."



Friday, 3 November 2017

Sankirtan Yatra at Haridwar

धर्मनगरी हरिद्वार में 

पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के 

शिष्य श्रीरामा भाई द्वारा 

"संकीर्तन यात्रा"।

दिनाँक - 5 नवम्बर 2017

समय - दोपहर 2.30 बजे

स्थान - आर्यनगर चौक से आरम्भ

सम्पर्क - 09997008832, 08755531150

Thursday, 5 October 2017

कार्तिक मास व्रत : 5 अक्टूबर से 4 नवम्बर


पापनाशक और पुण्य प्रदायक कार्तिक मास की महिमा
( कार्तिक मास व्रत : 5 अक्टूबर से 4 नवम्बर )

सूतजी ने महर्षियों से कहा : पापनाशक कार्तिक मास का बहुत ही दिव्य प्रभाव बतलाया गया है । यह मास भगवान विष्णु को सदा ही प्रिय तथा भोग और मोक्षरूपी फल प्रदान करनेवाला है ।

कार्तिक मास करने योग्य पाँच नियम :
हरिजागरणं प्रातःस्नानं तुलसिसेवनम् । 
उद्यापनं दीपदानं व्रतान्येतानि कार्तिके ।। 

‘रात्रि में भगवान विष्णु के समीप जागरण, प्रातःकाल स्नान करना, तुलसी की सेवा में संलग्न रहना, उद्यापन करना और दीप-दान देना - ये कार्तिक मास के पाँच नियम हैं ।’
(पद्म पुराण, उ.खंड : 117.3)

इन पाँचों नियमों का पालन करने से कार्तिक मास का व्रत करनेवाला पुरुष व्रत के पूर्ण फल का भागी होता है । वह फल भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाला बताया गया है ।

कार्तिक में त्यागने योग्य कर्म : महादेवजी ने कहा : बेटा कार्तिकेय ! कार्तिक मास में प्रातःस्नान पापनाशक है । इस मास में जो मनुष्य दूसरे के अन्न का त्याग कर देता है, वह प्रतिदिन कृच्छ्रव्रत का फल प्राप्त करता है । कार्तिक में शहद का सेवन, काँसे के बर्तन में भोजन और मैथुन का विशेषरूप से परित्याग करना चाहिए।

कार्तिक में भूमि शयन का फल : चन्द्रमा और सूर्य के ग्रहणकाल में ब्राह्मणों को पृथ्वी-दान करने से जिस फल की प्राप्ति होती है, वह फल कार्तिक में भूमि पर शयन करनेवाले पुरुष को स्वतः प्राप्त हो जाता है ।

कार्तिक में दान : कार्तिक मास में ब्राह्मण दम्पति को भोजन कराकर उनका पूजन करें । अपनी क्षमता के अनुसार कम्बल, ओढ़ना-बिछौना एवं नाना प्रकार के रत्न व वस्त्रों का दान करें । जूते और छाते का भी दान करने का विधान है ।

कार्तिक में पत्तल में भोजन करने का फल : कार्तिक मास में जो मनुष्य प्रतिदिन पत्तल में भोजन करता है, वह 14 इन्द्रों की आयुपर्यंत कभी दुर्गति में नहीं पड़ता । उसे समस्त तीर्थों का फल प्राप्त हो जाता है तथा उसकी सम्पूर्ण कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं । (पद्म पुराण, उ.खंड : अध्याय 120)

कार्तिक में मोक्ष देनेवाला और पाप नाश करनेवाला नियम : कार्तिक में तिल-दान, नदी-स्नान, सदा साधु पुरुषों का सेवन और पलाश-पत्र से बनी पत्तल में भोजन मोक्ष देनेवाला है । कार्तिक मास में मौनव्रत का पालन, पलाश के पत्तों में भोजन, तिलमिश्रित जल से स्नान, निरंतर क्षमा का आश्रय और पृथ्वी पर शयन - इन नियमों का पालन करनेवाला पुरुष युग-युग के संचित पापों का नाश कर डालता है ।

कार्तिक में हरि भजन से पितरों का उद्धार : संसार में विशेषतः कलियुग में वे ही मनुष्य धन्य हैं, जो सदा पितरों के उद्धार के लिए भगवान श्रीहरि का सेवन करते हैं । वे हरिभजन के प्रभाव से अपने पितरों का नरक से उद्धार कर देते हैं । यदि पितरों के उद्देश्य से दूध आदि के द्वारा भगवान विष्णु को स्नान कराया जाय तो पितर स्वर्ग में पहुँचकर कोटि कल्पों तक देवताओं के साथ निवास करते हैं ।

कार्तिक में तुलसी पूजन का फल : जो मुख में, मस्तक पर तथा शरीर पर भगवान की प्रसादभूता तुलसी को प्रसन्नतापूर्वक धारण करता है, उसे कलियुग नहीं छूता । कार्तिक मास में तुलसी का पूजन महान पुण्यदायी है । प्रयाग में स्नान करने से, काशी में मृत्यु होने से और वेदों का स्वाध्याय करने से जो फल प्राप्त होता है, वह सब तुलसी के पूजन से मिल जाता है ।

कार्तिक में आँवले की छाया में भोजन का फल : जो द्वादशी को तुलसीदल व कार्तिक में आँवले का पत्ता तोड़ता है, वह अत्यंत निंदित नरकों में पड़ता है । जो कार्तिक में आँवले की छाया में बैठकर भोजन करता है, उसका वर्ष भर का अन्न-संसर्गजनित दोष (जूठा या अशुद्ध भोजन करने से लगनेवाला दोष) नष्ट हो जाता है।

कार्तिक मास में दीप-दान का फल : ‘पुष्कर पुराण’ में आता है : ‘जो मनुष्य कार्तिक मास में संध्या के समय भगवान श्रीहरि के नाम से तिल के तेल का दीप जलाता है, वह अतुल लक्ष्मी, रूप, सौभाग्य एवं सम्पत्ति को प्राप्त करता है।’

कार्तिक मास के व्रत से चतुर्मास व्रत का फल : यदि चतुर्मास के चार महीनों तक चतुर्मास के शास्त्रोचित नियमों का पालन करना सम्भव न हो तो एक कार्तिक मास में ही सब नियमों का पालन करना चाहिए।

जो ब्राह्मण सम्पूर्ण कार्तिक मास में काँस, मांस, क्षौर कर्म (हजामत), शहद, दुबारा भोजन और मैथुन छोड़ देता है, वह चतुर्मास के सभी नियमों के पालन का फल पाता है ।
(स्कंद पुराण, नागर खण्ड, उत्तरार्ध)

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी : 
सत्संग के मुख्य अंश :
* कार्तिक मास के समान कोई मास नही, सतयुग के समान कोई युग नही, वेद के समान कोई शास्त्र नही और गंगा जी के सामान कोई तीर्थ नही |
* कार्तिक मास में पालने योग्य नियम :
* दीपदान करें, तुलसी वन या तुलसी के पौधे लगाये, तुलसी को सुबह आधा-एक गिलास पानी देना, स्वर्ण दान का फल देता है |
* भूमि पर शयन अथवा गद्दा हटाकर, सादा गुदड़ी बिछा कर तख़्त पर शयन तथा ब्रह्मचर्य का पालन करने से जीवात्मा का उद्धार होता है |
* उड़द, मसूर आदि भारी चीजों का त्याग तथा तिल का दान करें तथा आज कल नदिया शुद्ध नही है तो मानसिक स्नान नदी में कर लें |
* साधू-संतो का सत्संग, जीवन चरित्र का अनुसरण करके, मोक्ष प्राप्ति का इरादा बना ले |
* आंवले के वृक्ष की छाया में भोजन करने से एक वर्ष तक के अनगिनत पाप नष्ट हो जाते हैं, आंवले के उबटन से स्नान करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है, और अधिक प्रसन्नता मिलती है, संक्रांति, ग्रहण और रविवार को आंवले का उपयोग नही करना चाहिये |
* कार्तिक मास में अगर सभी दिन स्नान न कर पाए तो अंतिम ३ दिन (त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा) को सूर्योदय से पहले स्नान कर लें |
* अनजाने में जूठा खा लिया हो तो बाद में आंवला, बेल, ईख चबा लेने से जूठे के दोष से मुक्त हो जाता है |

Wednesday, 25 November 2015

Pradhan Times Coverage: गुरुनानक पर्व एवं कार्तिक पूर्णिमा की सबको बधाई

गुरुनानक पर्व एवं कार्तिक पूर्णिमा की सबको बधाई
सबका जीवन सुखमय हो
क्लेश का अंत हो 
यही कामना है हमारी।  
 
कार्तिक पूर्णिमा की शाम की संध्या के समय घर में दीपक जलाने से जीवन में अतुलित प्रकाश फैलता है |

Friday, 7 November 2014