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Thursday, 11 February 2021

Karthik Purnima and Gurunanak Jayanti

कार्तिक पूर्णिमा एवं गुरुनानक जयंती की आप सभी को हार्दिक बधाई। संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार आज कार्तिक पूर्णिमा पर दियों के प्रकाश से जगमगाया। साथ ही आश्रम वटवृक्ष के मध्य दर्शन देते चन्द्रदेव।

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Karthik Maas

कार्तिक मास आगमन पर धर्म गंगा घाट, हरिद्वार से मां गंगा के आरती दर्शन।

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Sunday, 17 November 2019

Press Release - Karthik Purnima 2019

Another activity by the devotees of Asaram Bapu Ji, shows their determination and contribution to the society.

कार्तिक पूर्णिमा पर #हरिद्वार में भव्य यात्रा। भगवन्नाम कीर्तन से पावन हुई धर्मनगरी।





Sankirtan Yatra at Haridwar

कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर संतश्री आशारामजी बापू आश्रम हरिद्वार में, श्रीरामा भाई के सान्निध्य में सत्संग तथा विशाल संकीर्तन यात्रा का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम रामा भाई द्वारा पूज्य गुरुदेव की पादुका पूजन हुआ, तत्पश्चात् "बाल संस्कार केंद्र" के बच्चों को पुरस्कार वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में हरिपुर कलाँ क्षेत्र की नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान, श्रीमती गीतांजलि जखमोला व भारतीय जनता पार्टी, युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष श्रीमनोज जखमोला भी सम्मिलित हुए। प्रस्तुत है कुछ तस्वींरें 👇

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Monday, 11 November 2019

कार्तिक पूर्णिमा -12 नवंबर

"आनंद अपार मेरे सद्गुरु के दरबार में"।

कार्तिक पूर्णिमा पर #हरिद्वार में पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के शिष्य श्रीरामा भाई के सान्निध्य में विशाल संकीर्तन यात्रा।

स्थान- हरिपुर कलाँ आश्रम से आरंभ।

समय- दोपहर 2 बजे से।

Let's learn #HowToDetoxifyAir with "Harinaam Sankirtan."



Thursday, 13 December 2018

Keys For Stress Free Life

तनाव मुक्त जीवन जीने के लिये उत्तम उपाय हैं- 'सद्गुरू शरण, सत्संग श्रवण व शास्त्र अध्ययन'। परम पूज्य संतश्री आशारामजी बापू कहते हैं- "ईश्वर के सिवाय कहीं भी मन लगाया तो अन्त में रोना ही पड़ेगा।"

आज लगभग हर व्यक्ति तनाव ग्रस्त है। इसका कारण है जीवन में "परमात्मा के लिये समय ना निकाल पाना।" मनुष्य कोल्हू के बैल की तरह जीवन भर घूमता रहता है और आखिर में हाथ आता है तनाव, चिंता, रोग व परेशानियाँ। मगर जो सद्गुरू शरण में हैं और सत्संग का आश्रय लेते हैं वे मौज में रहते हैं। तो प्रतिदिन सत्संग सुनने व भगवद् कीर्तन करने का नियम बनाईये और तनाव को दूर भगाईये।

Must watch the #Keys4StressFreeLife given by Param Pujya Sant Shri Asharam Bapuji used by Sadhvi Gyapti Bahan in her Satsang at Ashram Haridwar 👇


Friday, 17 November 2017

भगवन्नाम संकीर्तन यात्रा @ हरिद्वार

संतश्री आशारामजी बापू के साधकों द्वारा हरिद्वार नगरी में भव्य "संकीर्तन यात्रा" का आयोजन किया गया। भगवन्नाम कीर्तन में झूमते साधकों ने पूरे शहर को हरिरस की मस्ती से सराबोर कर दिया।


Wednesday, 8 November 2017

Sankirtan Yatra at Haridwar

कार्तिक पूर्णिमा पर धर्मनगरी हरिद्वार में पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के साधकों द्वारा श्रीरामा भाई के सान्निध्य में "भव्य संकीर्तन यात्रा" निकाली गई जिसमें पूज्य गुरुदेव का ऐसा "जैकारा" लगा कि पूरा हरिद्वार झूमा उठा।













Tuesday, 7 November 2017

Sankirtan Yatra at Haridwar

"हरि नाम की गूँज से पावन हुई धर्मनगरी"

कार्तिक पूर्णिमा पर हरिद्वार में, संतश्री आशारामजी बापू के साधकों ने निकाली भव्य संकीर्तन यात्रा। प्रिंट मीडिया ने भी लिया कवरेजः-

Pradhan Times:

Amar Ujala:

GuruAstha News:

Rashtriya Sahara:

Monday, 6 November 2017

Press Release : Karthik Purnima at Haridwar

कार्तिक-पूर्णिमा पर संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में साधकों की भीड़ उमड़ आई । इस अवसर पर "ऋषि प्रसाद सेवादार सम्मेलन" हुआ व "विद्यार्थी शिविर" के उत्तम विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया ।

Friday, 3 November 2017

Sankirtan Yatra at Haridwar

धर्मनगरी हरिद्वार में 

पूज्य संतश्री आशारामजी बापू के 

शिष्य श्रीरामा भाई द्वारा 

"संकीर्तन यात्रा"।

दिनाँक - 5 नवम्बर 2017

समय - दोपहर 2.30 बजे

स्थान - आर्यनगर चौक से आरम्भ

सम्पर्क - 09997008832, 08755531150

Thursday, 5 October 2017

कार्तिक मास व्रत : 5 अक्टूबर से 4 नवम्बर


पापनाशक और पुण्य प्रदायक कार्तिक मास की महिमा
( कार्तिक मास व्रत : 5 अक्टूबर से 4 नवम्बर )

सूतजी ने महर्षियों से कहा : पापनाशक कार्तिक मास का बहुत ही दिव्य प्रभाव बतलाया गया है । यह मास भगवान विष्णु को सदा ही प्रिय तथा भोग और मोक्षरूपी फल प्रदान करनेवाला है ।

कार्तिक मास करने योग्य पाँच नियम :
हरिजागरणं प्रातःस्नानं तुलसिसेवनम् । 
उद्यापनं दीपदानं व्रतान्येतानि कार्तिके ।। 

‘रात्रि में भगवान विष्णु के समीप जागरण, प्रातःकाल स्नान करना, तुलसी की सेवा में संलग्न रहना, उद्यापन करना और दीप-दान देना - ये कार्तिक मास के पाँच नियम हैं ।’
(पद्म पुराण, उ.खंड : 117.3)

इन पाँचों नियमों का पालन करने से कार्तिक मास का व्रत करनेवाला पुरुष व्रत के पूर्ण फल का भागी होता है । वह फल भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाला बताया गया है ।

कार्तिक में त्यागने योग्य कर्म : महादेवजी ने कहा : बेटा कार्तिकेय ! कार्तिक मास में प्रातःस्नान पापनाशक है । इस मास में जो मनुष्य दूसरे के अन्न का त्याग कर देता है, वह प्रतिदिन कृच्छ्रव्रत का फल प्राप्त करता है । कार्तिक में शहद का सेवन, काँसे के बर्तन में भोजन और मैथुन का विशेषरूप से परित्याग करना चाहिए।

कार्तिक में भूमि शयन का फल : चन्द्रमा और सूर्य के ग्रहणकाल में ब्राह्मणों को पृथ्वी-दान करने से जिस फल की प्राप्ति होती है, वह फल कार्तिक में भूमि पर शयन करनेवाले पुरुष को स्वतः प्राप्त हो जाता है ।

कार्तिक में दान : कार्तिक मास में ब्राह्मण दम्पति को भोजन कराकर उनका पूजन करें । अपनी क्षमता के अनुसार कम्बल, ओढ़ना-बिछौना एवं नाना प्रकार के रत्न व वस्त्रों का दान करें । जूते और छाते का भी दान करने का विधान है ।

कार्तिक में पत्तल में भोजन करने का फल : कार्तिक मास में जो मनुष्य प्रतिदिन पत्तल में भोजन करता है, वह 14 इन्द्रों की आयुपर्यंत कभी दुर्गति में नहीं पड़ता । उसे समस्त तीर्थों का फल प्राप्त हो जाता है तथा उसकी सम्पूर्ण कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं । (पद्म पुराण, उ.खंड : अध्याय 120)

कार्तिक में मोक्ष देनेवाला और पाप नाश करनेवाला नियम : कार्तिक में तिल-दान, नदी-स्नान, सदा साधु पुरुषों का सेवन और पलाश-पत्र से बनी पत्तल में भोजन मोक्ष देनेवाला है । कार्तिक मास में मौनव्रत का पालन, पलाश के पत्तों में भोजन, तिलमिश्रित जल से स्नान, निरंतर क्षमा का आश्रय और पृथ्वी पर शयन - इन नियमों का पालन करनेवाला पुरुष युग-युग के संचित पापों का नाश कर डालता है ।

कार्तिक में हरि भजन से पितरों का उद्धार : संसार में विशेषतः कलियुग में वे ही मनुष्य धन्य हैं, जो सदा पितरों के उद्धार के लिए भगवान श्रीहरि का सेवन करते हैं । वे हरिभजन के प्रभाव से अपने पितरों का नरक से उद्धार कर देते हैं । यदि पितरों के उद्देश्य से दूध आदि के द्वारा भगवान विष्णु को स्नान कराया जाय तो पितर स्वर्ग में पहुँचकर कोटि कल्पों तक देवताओं के साथ निवास करते हैं ।

कार्तिक में तुलसी पूजन का फल : जो मुख में, मस्तक पर तथा शरीर पर भगवान की प्रसादभूता तुलसी को प्रसन्नतापूर्वक धारण करता है, उसे कलियुग नहीं छूता । कार्तिक मास में तुलसी का पूजन महान पुण्यदायी है । प्रयाग में स्नान करने से, काशी में मृत्यु होने से और वेदों का स्वाध्याय करने से जो फल प्राप्त होता है, वह सब तुलसी के पूजन से मिल जाता है ।

कार्तिक में आँवले की छाया में भोजन का फल : जो द्वादशी को तुलसीदल व कार्तिक में आँवले का पत्ता तोड़ता है, वह अत्यंत निंदित नरकों में पड़ता है । जो कार्तिक में आँवले की छाया में बैठकर भोजन करता है, उसका वर्ष भर का अन्न-संसर्गजनित दोष (जूठा या अशुद्ध भोजन करने से लगनेवाला दोष) नष्ट हो जाता है।

कार्तिक मास में दीप-दान का फल : ‘पुष्कर पुराण’ में आता है : ‘जो मनुष्य कार्तिक मास में संध्या के समय भगवान श्रीहरि के नाम से तिल के तेल का दीप जलाता है, वह अतुल लक्ष्मी, रूप, सौभाग्य एवं सम्पत्ति को प्राप्त करता है।’

कार्तिक मास के व्रत से चतुर्मास व्रत का फल : यदि चतुर्मास के चार महीनों तक चतुर्मास के शास्त्रोचित नियमों का पालन करना सम्भव न हो तो एक कार्तिक मास में ही सब नियमों का पालन करना चाहिए।

जो ब्राह्मण सम्पूर्ण कार्तिक मास में काँस, मांस, क्षौर कर्म (हजामत), शहद, दुबारा भोजन और मैथुन छोड़ देता है, वह चतुर्मास के सभी नियमों के पालन का फल पाता है ।
(स्कंद पुराण, नागर खण्ड, उत्तरार्ध)

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी : 
सत्संग के मुख्य अंश :
* कार्तिक मास के समान कोई मास नही, सतयुग के समान कोई युग नही, वेद के समान कोई शास्त्र नही और गंगा जी के सामान कोई तीर्थ नही |
* कार्तिक मास में पालने योग्य नियम :
* दीपदान करें, तुलसी वन या तुलसी के पौधे लगाये, तुलसी को सुबह आधा-एक गिलास पानी देना, स्वर्ण दान का फल देता है |
* भूमि पर शयन अथवा गद्दा हटाकर, सादा गुदड़ी बिछा कर तख़्त पर शयन तथा ब्रह्मचर्य का पालन करने से जीवात्मा का उद्धार होता है |
* उड़द, मसूर आदि भारी चीजों का त्याग तथा तिल का दान करें तथा आज कल नदिया शुद्ध नही है तो मानसिक स्नान नदी में कर लें |
* साधू-संतो का सत्संग, जीवन चरित्र का अनुसरण करके, मोक्ष प्राप्ति का इरादा बना ले |
* आंवले के वृक्ष की छाया में भोजन करने से एक वर्ष तक के अनगिनत पाप नष्ट हो जाते हैं, आंवले के उबटन से स्नान करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है, और अधिक प्रसन्नता मिलती है, संक्रांति, ग्रहण और रविवार को आंवले का उपयोग नही करना चाहिये |
* कार्तिक मास में अगर सभी दिन स्नान न कर पाए तो अंतिम ३ दिन (त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा) को सूर्योदय से पहले स्नान कर लें |
* अनजाने में जूठा खा लिया हो तो बाद में आंवला, बेल, ईख चबा लेने से जूठे के दोष से मुक्त हो जाता है |

Monday, 14 November 2016

Guru Nanak Jayanti & Kathik Purnima

14 नवम्बर - गुरु नानक जयंती / कार्तिक पूर्णिमा

जप, ध्यान, गंगास्नान तथा मंदिर, पीपल के वृक्ष, तुलसी के पौधों के पास व गंगाजी में दीपदान का अक्षय फल। सभी लाभ अवश्य लें।

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से:-

" और हृदय-परिवर्तन हो गया.......

चाहे कोई विश्व का चक्रवर्ती सम्राट ही क्यों न हो किन्तु इस जहाँ से तो उसे भी खाली हाथ ही जाना है ।
"सिकंदर दारा हल्या वया सोने लंका वारा हल्या वया ।
कारुन खजाने जा मालिक हथे खाली विचारा हल्या वया।।"

‘सारे विश्व पर राज्य करने का स्वप्न देखनेवाला सिकंदर न रहा, जिसके पास सोने की लंका थी, वह रावण भी न रहा, बहुत बड़े खजाने का मालिक कारुन भी न रहा । ये सब इस जहाँ से खाली हाथ ही चले गये ।’

कारुन बादशाह तो इतना जालिम था कि उसने कब्रों तक को नहीं छोड़ा, कर-पर-कर लगाकर प्रजा का खून ही चूस लिया था । आखिर जब देखा कि प्रजा के पास अब एक भी चाँदी का रुपया नहीं बचा है, तब उसने घोषणा कर दी कि ‘जिसके पास चाँदी का एक भी रुपया होगा उसके साथ मैं अपनी बेटी की शादी कर दूँगा ।’

बादशाह की यह घोषणा सुनकर एक युवक ने अपनी माँ से कहा :
‘‘अम्माजान ! कुछ भी हो एक रुपया दे दे ।’’

माँ : ‘‘बेटा ! कारुन बादशाह के राज में किसीके पास रुपया ही कहाँ बचा है, जो तुझे एक रुपया दे दूँ ? तू खाना खा ले, मेरे लाल !’’

युवक : ‘‘अम्माजान ! मैं खाना तभी खाऊँगा जब तू मुझे एक रुपया दे देगी । मैं शहजादी के बिना नहीं जी सकता ।’’

हकीकत तो यह है कि परमात्मा के बिना कोई जी नहीं सकता है लेकिन बेवकूफी घुस जाती है कि ‘मैं प्रेमिका के बिना नहीं जी सकता... मैं शराब के बिना नहीं जी सकता...’

एक दिन, दो दिन, तीन दिन बेटा भूखा रहा... माँ ने छाती पीटी, सिर कूटा किंतु लड़का टस-से-मस न हुआ । अब माँ का हृदय हाथ में कैसे रहता ? माँ ने अल्लाहताला से प्रार्थना की । प्रार्थना करते-करते माँ को एक युक्ति सूझी । उसने बेटे से कहा :
‘‘मेरे लाल ! तू तीन दिन से भूखा मर रहा है । हठ पकड़कर बैठ गया है । कारुन ने किसीके पास एक रुपया तक नहीं छोड़ा है । फिर भी मुझे याद आया कि तेरे अब्बाजान को दफनाते समय उनके मुँह में एक रुपया रखा था । अब जब तू अपनी जान कुर्बान करने को ही तैयार हो गया है तो जा, अपने अब्बाजान की कब्र खोदकर उनके मुँह से एक रुपया निकाल ले और कारुन बादशाह को दे दे ।’’

कारुन ने अपने अब्बाजान की कब्र खोदकर एक रुपया लानेवाले लड़के को अपनी कन्या तो नहीं दी बल्कि सारे कब्र खुदवाये और मुर्दों के मुँह में पड़े हुए रुपये निकलवा लिये । कब्रों में पड़े हुए मुर्देबेचारे क्या बोलें ? यदि कोई हिन्दू राजा ऐसा करता तो उसे न मुसलमान बादशाह ही बख्सते न हिन्दू राजा ही क्षमा करते ।
कैसा लोभी और जालिम रहा होगा कारुन !

गुरु नानक को इस बात का पता चला । उन्होंने कारुन की इस बेवकूफी को दूर करने का मन-ही-मन निश्चय कर लिया और विचरण करते-करते कारुन के महल के पास अपना डेरा डाला ।

लोग नानकजी के पास मत्था टेकने आते । पुण्यात्मा-धर्मात्मा, समझदार लोग उनके अमृतवचन सुनकर शांति पाते । धीरे-धीरे उनका यश चतुर्दिक् प्रसरित होने लगा । कारुन को भी हुआ कि ‘चलो, किसी पीर-फकीर की दुआ मिले तो अपना खजाना और बढ़े ।’ वह भी मत्था टेकने आया ।

आत्मारामी संत-फकीर तो सभीके होते हैं । जो लोग बिल्कुल नासमझ होते हैं वे ही बोलते हैं कि ‘ये फलाने के महाराज हैं ।’ वरना संत तो सभी के होते हैं । जैसे गंगा का जल सबके लिए है, वायु सबके लिए है, सूर्य का प्रकाश सबके लिए समान है, ऐसे ही संत भी सबके लिए समान ही होते हैं ।

कारुन बादशाह नानकजी के पास आया । नानकजी को मत्था टेका । नानकजी ने उसको एक टका दे दिया और कहा : ‘‘बादशाह सलामत के लिए और कोई सेवा नहीं है केवल इस एक टके को सँभालकर रखना । (पहले के जमाने में एक रुपये में 16 आने होते थे । टका मतलब आधा आना - आज के करीब 3 पैसे ।) जब मुझे जरूरत पड़ेगी तब तुमसे ले लूँगा और हाँ, यहाँ तो मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी किन्तु मरने के बाद जब तुम परलोक में मिलोगे तब दे देना । मेरी यह अमानत सँभालकर रखना ।’’

कारुन : ‘‘महाराज ! मरने के बाद आपका टका मैं कैसे ले जाऊँगा ?’’

नानकजी : ‘‘क्यों ? इसमें क्या तकलीफ है? तुम इतने खजानों को तो साथ ले ही जाओगे । प्रजा का खून चूसकर और ढेर सारी कब्रें खुदवाकर तुमने जो खजाना एकत्रित किया है उसे तो तुम ले ही जाओगे, उसके साथ मेरा एक टका उठाने में तुम्हें क्या कष्ट होगा ? भैया ! पूरा ऊँट निकल जाय तो उसकी पूँछ क्या डूब सकती है ?’’

कारुन : ‘‘महाराज ! साथ में तो कुछ नहीं जायेगा । सब यहीं धरा रह जायेगा ।’’

नानकजी : ‘’इतना तो तुम भी समझते हो कि साथ में कुछ भी नहीं जायेगा । फिर इतने समझदार होकर कब्रें तक खुदवाकर खजाने में रुपये क्यों जमा किये ?’’

नानकजी की कृपा और शुभ संकल्प के कारण कारुन का हृदय बदल गया ! उसने खजाने के द्वार खोले और प्रजा के हित में संपत्ति को लगा दिया ।

जिसने कब्र तक से पैसे निकलवा लिये ऐसे कारुन जैसे का भी हृदय परिवर्तित कर दिया नानकजी ने !
                                                           
(ऋषि प्रसाद : जून 2002)

Wednesday, 25 November 2015

Pradhan Times Coverage: गुरुनानक पर्व एवं कार्तिक पूर्णिमा की सबको बधाई

गुरुनानक पर्व एवं कार्तिक पूर्णिमा की सबको बधाई
सबका जीवन सुखमय हो
क्लेश का अंत हो 
यही कामना है हमारी।  
 
कार्तिक पूर्णिमा की शाम की संध्या के समय घर में दीपक जलाने से जीवन में अतुलित प्रकाश फैलता है |