Showing posts with label Krishna Janmashtami. Show all posts
Showing posts with label Krishna Janmashtami. Show all posts

Sunday, 21 August 2022

Shri Krishna Janmashtami Celebrations - Ashram Haridwar

 जीवन का सार, 

श्री कृष्ण अवतार 

Friday, 3 September 2021

Krishna Janmashtami Celebrations - Ashram Haridwar

"जन्माष्टमी" पर संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में बच्चों द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया। आईये, हम भी आनन्द लें।

Tuesday, 31 August 2021

Krishna Janmashtami 2021 - Ashram Haridwar

संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में आज "जन्माष्टमी" का पावन पर्व मनाया गया। आश्रम में, भक्तों ने जप और वीडियो सत्संग का लाभ लिया। इस अवसर पर बच्चों ने गोपी रूप में, नृत्य कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।






Sunday, 16 August 2020

Krishna Janmashtami - 12 August

संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में 12 अगस्त को 'जन्माष्टमी' का त्यौहार मनाया गया। माताओं- बहनों का हृदय तो वात्सल्य से भरा होता ही है परंतु कल भाइयों ने भी नन्हे कान्हा को सिर पर उठा कर खूब आनंद लिया।

Subscribe Our YouTube Channel :

Monday, 16 September 2019

Shree Krishna Janmashtami - 23-August-2019

"वृंदावन में गोपी आया हम गोपीयन के मन को भाया।"

"श्रीकृष्ण जन्माष्टमी"
पर 
संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में 
नॉन साधक बच्चों 
द्वारा 
मनमोहक प्रस्तुति 👇

Friday, 26 August 2016

Janmashtami Celebrations at AshramHaridwar

कल "जन्माष्टमी" के पावन पर्व पर हरिद्वार आश्रम में बच्चों द्वारा "राधाकृष्ण" एवं "गोप-गोपियों" के रूप में एक नाटिका प्रस्तुत की गई जिसमें बच्चों ने मटकी फोड़ी व नृत्य किया। इसके पश्चात् बच्चों ने पूज्य बापूजी की आरती करी और प्रसाद पाया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को नोटबुक व पेन वितरित किये गये।

Wednesday, 24 August 2016

25 August - Krishna Janmashtami

सर्व फलदायक जन्माष्टमी व्रत - 25th अगस्त

जन्माष्टमी व्रत अति पुण्यदायी है | "स्कंद पुराण" में आता है कि " जो लोग जन्माष्टमी व्रत करते हैं या करवाते हैं, उनके समीप सदा लक्ष्मी स्थिर रहती है | व्रत करनेवाले के सारे कार्य सिद्ध होते हैं | जो इसकी महिमा जानकर भी जन्माष्टमी व्रत नहीं करते, वे मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होते हैं |"
प्रेमावतार का प्राकट्य दिवस - जन्माष्टमी
 
चित्त की विश्रांति सामर्थ्य की जननी है। सामर्थ्य क्या है? बिना व्यक्ति, बिना वस्तु के भी सुखी रहना – ये बड़ा सामर्थ्य है। अपना ह्रदय वस्तुओं के बिना, व्यक्तियों के बिना भी परम सुख का अनुभव करे – यह स्वतंत्र सुख परम सामर्थ्य बढ़ाने वाला है। श्रीकृष्ण के जीवन में सामर्थ्य है, माधुर्य है, प्रेम है। जितना सामर्थ्य उतना ही अधिक माधुर्य, उतना ही अधिक शुद्ध प्रेम है श्रीकृष्ण के पास |
 
पैसे से प्रेम करोगे तो लोभी बनायेगा, पद से प्रेम करोगे तो अहंकारी बनायेगा, परिवार से प्रेम करोगे तो मोही बनायेगा लेकिन प्राणिमात्र के प्रति समभाव वाला प्रेम रहेगा, शुद्ध प्रेम रहेगा तो वह परमात्मा का दीदार करवा देगा।
 
प्रेम किसीका अहित नहीं करता। जो स्तनों में जहर लगाकर आयी उस पूतना को भी श्री कृष्ण ने स्वधाम पहुँच दिया। पूतना कौन थी ? पूतना कोई साधारण स्त्री नहीं थी पूर्वकाल में राजा बलि की बेटी थी, राजकन्या थी | भगवान वामन आये तो उनका रूप सौंदर्य देखकर उस राजकन्या को हुआ कि " मेरी सगाई हो गयी है, मुझे ऐसा बेटा हो तो मैं गले लगाऊँ और उसको दूध पिलाऊँ " लेकिन जब नन्हा – मुन्ना वामन विराट हो गया और बलि राजा का सर्वस्व छीन लिया तो उसने सोचा कि " मैं इसको दूध क्यों पिलाऊँ? इसको तो जहर पिलाऊँ, जहर।"
वही राजकन्या पूतना हुई, दूध भी पिलाया और जहर भी। उसे भी भगवान ने अपना स्वधाम दे दिया। प्रेमास्पद जो ठहरे ……!
 
- पूज्य #AsharamBapuji के सत्संग से