दीपावली के अवसर पर संतश्री आशारामजी बापू आश्रमों द्वारा देश के अनेक गरीब व पिछड़े क्षेत्रों में भंडारों का आयोजन किया जाता है। हरिपुर कलाँ स्थित, आश्रम हरिद्वार में भी हुआ भंडारे का आयोजन। लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थापित सपेरा बस्ती के अभावग्रस्त लोगों ने लिया लाभ। मीडिया कवरेज 👇
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Tuesday, 29 October 2019
Friday, 25 October 2019
Dhanteras - धनतेरस - 25 अक्टूबर
आज संतश्री आशारामजी बापू आश्रम हरिद्वार, में धनतेरस के शुभ अवसर पर गरीब व पिछड़ी सपेरा बस्ती के बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों के लिये दिवाली के निमित्त भण्डारे का आयोजन किया गया।
हरिद्वार आश्रम से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस बस्ती में पूज्य गुरुदेव भी सन् 2009 में पधारे थे व पानी की कमी से त्रस्त बस्ती वालों के अनुरोध पर, बस्ती में हैंडपंप लगवाया था। आज वीडियो सत्संग व भजन-कीर्तन के पश्चात् भोजन प्रसादी तथा दीवाली की सामग्री के साथ ही सभी को दक्षिणा भी प्रदान की गई।
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Monday, 21 October 2019
25 से 27 अक्टूबर - धनतेरस से दीपावली
हर व्यक्ति जीवन में धनवान होना चाहता है। अब धन यदि भौतिक के साथ-साथ आध्यात्मिक भी हो तो कहना ही क्या!
पूज्य संतश्री आशारामजी बापू द्वारा "धनतेरस से दीपावली" तक बताई गई, भौतिक व आध्यात्मिक खजाने को बढाने वाली साधना यदि आपने नहीं की तो किया क्या?
धनवान होने की तीन दिवसीय सरल साधना जानने के लिये लिंक पर क्लिक करें 👇
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Tuesday, 6 November 2018
7 नवम्बर - शुभ दीपावली - Happy Diwali
7 नवम्बर - शुभ दीपावली
परम पूज्य संतश्री आशारामजी बापू बताते हैं कि दीपावली की रात्रि में किया गया जप-तप, ध्यान-भजन अनंत गुना फलदायक होता है। दीपावली के दिन लक्ष्मीजी क्षीरसागर से प्रकट हुईं थीं अत: दीपावली लक्ष्मीजी का प्राकट्य दिवस भी है। बापूजी लक्ष्मीप्राप्ति हेतु दीपावली से भाईदूज तक तीन दिन की बहुत ही सरल साधना भक्तों को बताते हैं जिससे कि दरिद्रता का विनाश व आजीविका का उचित निर्वाह हो सके।
लक्ष्मीप्राप्ति हेतु साधना:-
दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात् भाईदूज तक एक स्वच्छ कमरे में दीपक एवं धूपबत्ती जलाकर (सम्भव हो तो गाय के गोबर से बनी धूपबत्ती), पीले वस्त्र पहनकर पश्चिम की तरफ मुँह करके बैठें। ललाट पर केसर का तिलक तथा स्फटिक मनकों से बनी माला द्वारा नित्य प्रात:काल निम्न मंत्र की दो मालायेँ जपें:-
"ॐ नमो भाग्यलक्ष्म्यै च विद्महे,
अष्टलक्ष्म्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात् ॥"
तेल का दीपक व धूपबत्ती लक्ष्मीजी की बायीं ओर घी का दीपक दायीं ओर तथा नैवेध्य आगे रखा जाता है। लक्ष्मीजी को तुलसी व मदार या धतूरे का फूल नहीं चढ़ाना चाहिये इससे हानि होती है। घर में लक्ष्मीजी के वास, दरिद्रता के विनाश और आजीविका के उचित निर्वाह हेतु यह साधना करने वाले पर लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं।
पूज्य बापुजी तथा आश्रमों द्वारा हर साल दीपावली के पावन पर्व पर पिछड़े हुए, गरीब आदिवासी क्षेत्रों में भंडारों का आयोजन किया जाता है। दरिद्र नारायण के बीच दीवाली मनाकर पूज्य बापूजी का हृदय अत्यंत प्रसन्न होता है। आईये देखते हैं कुछ झलकियाँ:-
Monday, 5 November 2018
5 नवम्बर - धनतेरस
परम पूज्य संतश्री आशाराम बापूजी कहते हैं - "धन तीन तरह का होता है - वित्त, लक्ष्मी एवं महालक्ष्मी। महान उद्देश्य अर्थात् परमात्मा प्राप्ति के लिये जिस लक्ष्मी का उपयोग हो तो समझो हमारे घर में वह लक्ष्मी 'महालक्ष्मी' होकर आयीं हैं। यह महालक्ष्मी भगवान नारायण से मिलाने वाली होंगी।"
इस दिन संध्या के समय घर के बाहर हाथ में जगता हुआ दीपक लेकर यमराज देव की प्रसन्नता व अकाल मृत्यु टालने हेतु निम्न मंत्र के साथ दीपदान करना चाहिये :-
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