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Wednesday, 2 October 2019

Self-Realization Celebrations at AshramHaridwar

"Self-Realization" is the greatest achievement of human life - according to the scriptures.

And the followers, of the Hindu #PeaceLovingSaint AsharamBapuJi strictly follow These Holy Books.

पितृ अमावस्या व आत्मसाक्षात्कार दिवस पर संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में उमड़ी भक्तों की भीड़। जहाँ एक ओर पितरों को दी विदाई, वहीं दूसरी ओर अश्विन नवरात्रि के दूसरे दिन मनाया गया पूज्य बापूजी का आत्मसाक्षात्कार दिवस। इस अवसर पर पिछड़ी बस्तियों के बच्चों को विद्यार्थी उपयोगी सामग्री का वितरण भी किया गया।




Tuesday, 1 October 2019

30th September- Self-Realization Day

कल संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में पूज्य बापूजी का आत्मसाक्षात्कार दिवस धूमधाम से मनाया गया। साथ ही पिछड़ी बस्तियों के बच्चों को सत्संग व भण्डारे का लाभ मिला और उनमें विद्यार्थी उपयोगी सामग्री का वितरण भी किया गया।

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Thursday, 26 September 2019

आत्मसाक्षात्कार दिवस - ३० सितंबर

आत्मसाक्षात्कार दिवस - ३० सितंबर
समय - सुबह १० बजे से ।
स्थान: संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार

🎉🎊Grand Celebration on 56th Self-Realization Day of Pujya Gurudev, at Santshri Asharamji Bapu Ashram, Haridwar.🎊🎉

🙏You all are cordially invited.🙏
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Wednesday, 20 September 2017

21-September - Atma Sakshatkar Diwas

21 सितम्बर – पूज्य संतश्री आशारामजी बापू का आत्मसाक्षात्कार दिवस।


मुंडकोपनिषद् में आता है: “स यो ह वै तत्परमं ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति........अर्थात् “निश्चय ही जो कोई भी उस परब्रहम परमात्मा को जान लेता है वह ब्रह्म ही हो जाता है।“ संत ज्ञानेश्वर महाराज स्थितप्रज्ञ पुरुष की महानता बताते हुए कहते हैं: “जो आत्मज्ञान से संतुष्ट व परमानन्द से पुष्ट हो गये हों, उन्हीं को सच्चे स्थितप्रज्ञ जानो। ये अहंकार का मद दूर कर देते हैं, सब प्रकार की कामनाओं को त्याग देते हैं और स्वयं विश्वरूप होकर संसार में विचरण करते हैं।“

स्वामी शिवानंद कहते हैं: “जीवनमुक्त महापुरुष आध्यात्मिक शक्ति के भंडार होते हैं। वे संसार की भिन्न-भिन्न दिशाओं में आध्यात्मिक शक्ति की धाराएँ अथवा लहरें भेजते रहते हैं। उनकी शरण में जाइये, आपके संशय स्वयं निवृत्त हों जायेंगे। आप उनकी उपस्थिति में एक विशेष प्रकार के आनंद व शांति का अनुभव करेंगे।“

आत्मसाक्षात्कार क्या है? अपने आप को आत्मस्वरूप जानना ही आत्मसाक्षात्कार है। परब्रह्म परमात्मा अर्थात् अपनी आत्मा को ज्यों का त्यों जान लेना ही वास्तव में जानना है बाकी सब तो सूचनाएँ इकट्ठी करना है। भगवद्गीता के सातवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: “मनुष्याणाम् सहस्त्रेषु.........करोड़ों मनुष्यों में कोई विरला ही परमात्म प्राप्ति अर्थात् आत्मसाक्षात्कार करता है।“

इस घोर कलिकाल में ऐसे महापुरुष धरती पर कभी कभार ही अवतरित होते हैं। पूज्य संतश्री आशारामजी बापू इन्हीं महापुरुषों में से एक हैं। अब ऐसे महापुरुषों को पहचानने के लिये ऊँची समझ, ऊँची दृष्टि, ऊँचा ज्ञान चाहिये परन्तु कलयुग में होती है उल्लुओं की भरमार। किसी उल्लू ने सब उल्लुओं को इकट्ठा करके प्रस्ताव पास कर दिया कि “सूर्य का अस्तित्व ही नहीं है क्योंकि उल्लू को दिन में दिखाई नहीं देता तो क्या सूर्य का अस्तित्व मिट जायेगा?”

ऐसे ही जब-जब महापुरुष धरती पर आये, उनको अनेक यातनाएं दी गईं, बिना कारण कठोर दण्ड दिये गये मगर वो मुस्कुराते रहे, ईश्वरीय मस्ती में झूमते रहे व लोक कल्याण करते रहे। यही है आत्मसाक्षात्कार का वास्तविक स्वरूप।

Saturday, 1 October 2016

2 October - Atma Sakshatkar

2 अक्टूबर - संतश्री आशारामजी बापू आत्म साक्षात्कार दिवस

 

ऐसा होता है आत्मसाक्षात्कार - पूज्य बापूजी

 

आत्मसाक्षात्कार मतलब क्या ?

आत्मसाक्षात्कार मतलब जो सत् है, चित् है, आनंद है और साक्षात् है | कल्पित ‘मैं – मेरा’ ज्ञान द्वारा उड़ जाये और जो वास्तविक है, साक्षात् है, उसी में अपने ‘मैं’ का साक्षात्कार करोगे तो इनका अस्तित्व और अपने ‘मैं’ का अस्तित्व सब एकरूप दिखेगा | अर्जुन ने पूछा था : " स्थितप्रज्ञस्य का भाषा ...."
भगवान् श्रीकृष्ण बोले : " प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ ....."

 

‘हे अर्जुन ! जिस काल में यह पुरुष मन में स्थित सम्पूर्ण कामनाओं को भलीभाँति त्याग देता है और आत्मा से आत्मा में ही संतुष्ट रहता है, उस काल में वह स्थितप्रज्ञ कहा जाता है |’ ( गीता :२.५५ )

 

बोले फिर तो जड़ हो जायेगा | नहीं, वह चैतन्य हो जायेगा ! आत्मसाक्षात्कार के बाद जड़ नहीं होता | जीवन जीने का मजा तो आत्मसाक्षात्कार के बाद ही आता है, अन्यथा तो बैलगाड़ियों में बँधे बैल की तरह मजदूरी करके मरना है | साक्षात्कारी पुरुष की हाजरी मात्र से वातावरण आनंदित हो जाता है | जो श्रीकृष्ण में चम – चम चमकता है, भगवान शिव में समाधि – सुख देता है, माँ जगदम्बा में आदि शक्ति रूप से उभरता है, वही साँई लीलाशाहजी बापू में ज्ञान देता है और आशाराम में छुपा हुआ जागृत होता है, उसका नाम है आत्मसाक्षात्कार | यदि कोई केवल तीन मिनट के लिए आत्मसाक्षात्कार की अवस्था में स्थित हो जाय तो उसका दुबारा जन्म नहीं होता, वह सदा के लिए जन्म - मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है| अरे ! मुक्त क्या होता है उसका यह अनुभव हो जाता है :-

 

" मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आयी, जहाँ मेरे अपने सिवा कुछ नहीं है |
पता जब चला मेरी हस्ती का मुझको, सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नहीं है ||"

 

अपने भूतकाल को याद कर – करके विचारों के जाल में कब तक फँसते रहोगे ? मन की मान्यताओं में कब तक उलझते रहोगे ? सब बंधनों को काटकर उठ खड़े हो, मुक्त हो जाओ | शरीर एवं मन के किले को छोडकर आत्मा के आकाश में विहार करो | ऐसा ज्ञान पा लो कि तुम जीते - जी ही काल से परे हो जाओ और काल सिर कूटता रह जाय | ऐसा ज्ञान पाना कठिन नहीं है किंतु लोगों को अज्ञान को छोड़ने में, अपनी मान्यताओं को तोड़ने में कठिनाई लगती है | अज्ञान और मान्यताओं में बहने की बेवकूफी सदियों की है अत: उसे छोड़ना कठिन लगता है| नहीं तो ईश्वर को पाने में क्या कठिनाई है ! ईश्वर तो अपना आत्मस्वरूप है |

 

आप बस अपना उद्देश्य बना लो !

ईश्वरप्राप्ति में जो सुख है और समाज का भला है उसकी बराबरी में कुछ नहीं है | अपने स्वरूप का, अपने आत्मा का पता चल जाना यह बड़े – में – बड़ी उपलब्धि है | इसके अतिरिक्त जगत की सारी उपलब्धियाँ दिखनेमात्र की हैं | ईश्वर के सिवाय कहीं भी मन लगाया तो अंत में रोना ही पड़ेगा | भगवान को पाने की महत्ता समझ में आ जाये और भगवान को पाने का इरादा पक्का हो जाये तो आपकी ९५ प्रतिशत साधना हो गयी ! बाकी ५ प्रतिशत में ३ प्रतिशत आपकी भावना, श्रद्धा और २ प्रतिशत आपकी साधना | केवल उद्देश्य बना लो ईश्वरप्राप्ति का | बस हो गया.........।

 

“ पूर्ण गुरु कृपा मिली, पूर्ण गुरु का ज्ञान।
आसुमल से हो गये, साईं आशाराम।।“

Sunday, 10 July 2016

Self Realization

पूज्य बापूजी बता रहे हैं छ: महीने में आत्म – साक्षात्कार करने का आसान तरीका। आइये जानें कैसे :-

Thursday, 15 October 2015

Pradhan Times Coverage: मनुष्य - जन्म की सर्वोपरि उपलब्धि - आत्मसाक्षात्कार

आत्मसाक्षात्कार - जिसे पाने के बाद और कुछ पाना बाकी नहीं रहता | जिस लाभ से बड़कर कोई लाभ नहीं, जिस सुख से बड़कर कोई सुख नहीं , जिस ज्ञान से बड़कर कोई ज्ञान नहीं, जिस आनंद से बड़कर कोई आनंद नहीं |
 
पूज्य श्री के 51वें आत्मसाक्षात्कार दिवस की सभी भाई बहनों को हार्दिक बधाई |
 
 ‪#‎SevaDivas
 


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