Friday, 15 February 2019

मातृ-पितृ पूजन दिवस - १४ फरवरी


Parents Worship Day - 14th Februaryमातृ-पितृ पूजन दिवस - १४ फरवरी 


"Let Us Honor Our Parents" because they love us Selflessly and Unconditionally.

Inspired by Param Pujya Santshri Asharamji Bapu, Shri Yog Vedant Ashram, California Chapter (USA) celebrating "Parents Worship Day" on 10th February in the presence of California State Assembly Member Mr. Kenson Chu.

"All are Welcome. A free event for the entire family. Don't miss the chance to honor your parents wholeheartedly."

संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, कैलिफोर्निया (अमेरिका) द्वारा 10 फरवरी को "मातृ-पितृ पूजन दिवस" के लिए आप सभी सादर आमंत्रित हैं। शाम 3 बजे कम्युनिटी हॉल, सेन जोस पब्लिक लाइब्रेरी, कैलिफोर्निया पहुँच कर इस पर्व को यादगार बनायें।

Parents Worship Day - 14 February

Parents_Worship_Day-14th February


Back to our roots by the grace of venerable Sadguru Santshri Asharam Bapu Ji #MPPD_Celebrated_Widely yesterday.

Despite heavy rains children also came to Santshri Asharamji Bapu #AshramHaridwar to worship their parents. It shows the end of #ValentinesDay era. Happy #ParentsWorshipDay -14thFeb.

तेज बरसात के बावजूद माता-पिता का पूजन करने संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार पहुँचे बच्चे। यह दर्शाता है कि "वैलेंटाइन्स डे" अब भूतकाल की बात हो चुकी है और भारत फिर से सुनहरे भविष्य की ओर अग्रसर है।









Thursday, 14 February 2019

Parents Worship Day - 14 February

मातृ-पितृ पूजन दिवस - १४ फरवरी


#हरिद्वार गंगा किनारे की पिछड़ी बस्ती में भी पहुँचा परम पूज्य संतश्री आशारामजी बापू का प्यारा सन्देश। बच्चों ने किया माताओं का पूजन व सम्मान और पाया उनका स्नेहाशीष।

India is celebrating #HappyParentsWorshipDay on 14th February and making this day never to be forgotten @PMOIndia.






Wednesday, 30 January 2019

षटतिला एकादशी - 31 जनवरी 2019

युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा: भगवन् ! माघ मास के कृष्णपक्ष में कौन सी एकादशी होती है? उसके लिए कैसी विधि है तथा उसका फल क्या है ? कृपा करके ये सब बातें हमें बताइये ।

श्रीभगवान बोले: नृपश्रेष्ठ ! माघ (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार पौष) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी ‘षटतिला’ के नाम से विख्यात है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है । मुनिश्रेष्ठ पुलस्त्य ने इसकी जो पापहारिणी कथा दाल्भ्य से कही थी, उसे सुनो ।

दाल्भ्य ने पूछा: ब्रह्मन्! मृत्युलोक में आये हुए प्राणी प्राय: पापकर्म करते रहते हैं । उन्हें नरक में न जाना पड़े इसके लिए कौन सा उपाय है? बताने की कृपा करें ।

पुलस्त्यजी बोले: महाभाग ! माघ मास आने पर मनुष्य को चाहिए कि वह नहा धोकर पवित्र हो इन्द्रियसंयम रखते हुए काम, क्रोध, अहंकार ,लोभ और चुगली आदि बुराइयों को त्याग दे । देवाधिदेव भगवान का स्मरण करके जल से पैर धोकर भूमि पर पड़े हुए गोबर का संग्रह करे । उसमें तिल और कपास मिलाकर एक सौ आठ पिंडिकाएँ बनाये । फिर माघ में जब आर्द्रा या मूल नक्षत्र आये, तब कृष्णपक्ष की एकादशी करने के लिए नियम ग्रहण करें । भली भाँति स्नान करके पवित्र हो शुद्ध भाव से देवाधिदेव श्रीविष्णु की पूजा करें । कोई भूल हो जाने पर श्रीकृष्ण का नामोच्चारण करें । रात को जागरण और होम करें । चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेघ आदि सामग्री से शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले देवदेवेश्वर श्रीहरि की पूजा करें । तत्पश्चात् भगवान का स्मरण करके बारंबार श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़े, नारियल अथवा बिजौरे के फल से भगवान को विधिपूर्वक पूजकर अर्ध्य दें । अन्य सब सामग्रियों के अभाव में सौ सुपारियों के द्वारा भी पूजन और अर्ध्यदान किया जा सकता है । अर्ध्य का मंत्र इस प्रकार है:


कृष्ण कृष्ण कृपालुस्त्वमगतीनां गतिर्भव ।
संसारार्णवमग्नानां प्रसीद पुरुषोत्तम ॥
नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन ।
सुब्रह्मण्य नमस्तेSस्तु महापुरुष पूर्वज ॥
गृहाणार्ध्यं मया दत्तं लक्ष्म्या सह जगत्पते ।

‘सच्चिदानन्दस्वरुप श्रीकृष्ण ! आप बड़े दयालु हैं । हम आश्रयहीन जीवों के आप आश्रयदाता होइये । हम संसार समुद्र में डूब रहे हैं, आप हम पर प्रसन्न होइये । कमलनयन ! विश्वभावन ! सुब्रह्मण्य ! महापुरुष ! सबके पूर्वज ! आपको नमस्कार है ! जगत्पते ! मेरा दिया हुआ अर्ध्य आप लक्ष्मीजी के साथ स्वीकार करें ।’

तत्पश्चात् ब्राह्मण की पूजा करें । उसे जल का घड़ा, छाता, जूता और वस्त्र दान करें । दान करते समय ऐसा कहें : ‘इस दान के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण मुझ पर प्रसन्न हों ।’ अपनी शक्ति के अनुसार श्रेष्ठ ब्राह्मण को काली गौ का दान करें । द्विजश्रेष्ठ ! विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह तिल से भरा हुआ पात्र भी दान करे । उन तिलों के बोने पर उनसे जितनी शाखाएँ पैदा हो सकती हैं, उतने हजार वर्षों तक वह स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है । तिल से स्नान होम करे, तिल का उबटन लगाये, तिल मिलाया हुआ जल पीये, तिल का दान करे और तिल को भोजन के काम में ले ।’

इस प्रकार हे नृपश्रेष्ठ ! छ: कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षटतिला’ कहलाती है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है ।

Friday, 4 January 2019

Press Release - Tulsi Pujan Divas

25 दिसम्बर को "क्रिसमस ट्री" पर बल्ब लगाने की अपेक्षा "तुलसी पूजन दिवस" मनाना कितना फायदेमंद है यह बात धीरे-धीरे सब को समझ आने लगी है।

कुछ वर्षों पूर्व पूज्य संतश्री आशारामजी बापू ने 25 दिसम्बर को "तुलसी पूजन दिवस" मनाया तो इसकी आलोचना भी हुई मगर जब लोगों ने तुलसी माता का पूजन कर इसके नीचे दीपक प्रजव्वलित किया तो उन्हें अनोखे आनन्द व शान्ति की अनुभूति हुई और उन्होने इसे अपनाना शुरू कर दिया। आज यह केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशाल रूप से मनाया जाने लगा है।

अवश्य पढ़ें संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में "तुलसी पूजन दिवस" की कवरेज, संस्कार निर्माण द्वारा:-

Wednesday, 26 December 2018

25 दिसम्बर - तुलसी_पूजन_दिवस

संतश्री आशारामजी बापू आश्रम, हरिद्वार में आज "तुलसी पूजन दिवस" मनाया गया। पूज्य बापूजी द्वारा आरम्भ किये गये इस पर्व को अब केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सराहा जा रहा है। इसका कारण है कि तुलसी के अनेक लाभ। धार्मिक रूप से तो यह अत्यन्त पवित्र है ही परन्तु औषधि रूप से भी बहुत उपयोगी है। इसे "Wonder Drug" भी कहा जाता है। इसका पौधा 24 घंटे ऑक्सीजन देता है व पर्यावरण को शुद्ध रखता है। यदि आज हर जगह तुलसी के पौधे हो जायें तो वातावरण को शुद्ध, सात्विक व पवित्र होने में देर नहीं लगेगी तथा कैंसर जैसे जटिल रोगों का ईलाज भी आसानी से हो जायेगा।







Thursday, 13 December 2018

Keys For Stress Free Life

तनाव मुक्त जीवन जीने के लिये उत्तम उपाय हैं- 'सद्गुरू शरण, सत्संग श्रवण व शास्त्र अध्ययन'। परम पूज्य संतश्री आशारामजी बापू कहते हैं- "ईश्वर के सिवाय कहीं भी मन लगाया तो अन्त में रोना ही पड़ेगा।"

आज लगभग हर व्यक्ति तनाव ग्रस्त है। इसका कारण है जीवन में "परमात्मा के लिये समय ना निकाल पाना।" मनुष्य कोल्हू के बैल की तरह जीवन भर घूमता रहता है और आखिर में हाथ आता है तनाव, चिंता, रोग व परेशानियाँ। मगर जो सद्गुरू शरण में हैं और सत्संग का आश्रय लेते हैं वे मौज में रहते हैं। तो प्रतिदिन सत्संग सुनने व भगवद् कीर्तन करने का नियम बनाईये और तनाव को दूर भगाईये।

Must watch the #Keys4StressFreeLife given by Param Pujya Sant Shri Asharam Bapuji used by Sadhvi Gyapti Bahan in her Satsang at Ashram Haridwar 👇